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सऊदी अरब पर हमला हुआ तो एक्टिव होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? पाकिस्तान की दो टूक—‘कोई शक न रखे’

अंतरराष्ट्रीय/सुरक्षा | ABC NATIONAL NEWS | इस्लामाबाद | 10 सितंबर 2026

सऊदी पर हूती हमलों के बाद पाकिस्तान का बड़ा बयान

सऊदी अरब पर हूती ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद पाकिस्तान ने साफ संकेत दिया है कि सऊदी अरब पर बड़ा सशस्त्र हमला होने की स्थिति में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुआ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता लागू हो सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर यमन से होने वाला हमला या संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है, तो तीनों देशों के बीच हुआ रक्षा समझौता सक्रिय हो जाएगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब हूती समूह ने सऊदी अरब के अबहा, खमिस मुशैत, जाज़ान और नजरान शहरों की ओर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में 73 नागरिक घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।

पाकिस्तान ने दी सीधी चेतावनी

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल से बातचीत में हूतियों को चेतावनी दी कि वे अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे व्यापक टकराव का फायदा उठाकर सऊदी अरब को इस संघर्ष में खींचने की कोशिश न करें।

आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ बिना उकसावे की आक्रामक कार्रवाई या यमन में चल रहे संघर्ष का सऊदी क्षेत्र में फैलना रक्षा समझौते को सक्रिय कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते की शर्तों को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान अपनी प्रतिबद्धता निभाएगा।

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मक्का डिफेंस पैक्ट में क्या है?

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने पिछले महीने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मूल सिद्धांत यह है कि एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।

यही वजह है कि सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर किसी हमले को समझौते के तहत “सशस्त्र हमला” माना जाता है, तो इसके बाद पाकिस्तान और तुर्किये की भूमिका केवल राजनीतिक समर्थन तक सीमित नहीं रह सकती।

पाकिस्तान ने सऊदी की रक्षा के अधिकार का समर्थन किया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्रालय ने हूती हमलों की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान ने कहा कि ये हमले सऊदी अरब की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सऊदी अरब को अपने नागरिकों, क्षेत्र और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार है।

पाकिस्तान ने सऊदी नेतृत्व और जनता के प्रति अपनी “अटूट एकजुटता” भी व्यक्त की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह सऊदी अरब के नागरिकों और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा तथा देश की राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले जरूरी कदमों का समर्थन करता है।

क्या क्षेत्रीय संघर्ष और बड़ा होने वाला है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यमन से सऊदी अरब पर होने वाले हमले अब तीन देशों के रक्षा समझौते को वास्तव में सक्रिय करने की स्थिति तक पहुंच रहे हैं? पाकिस्तान ने फिलहाल साफ संकेत दे दिया है कि सऊदी अरब पर आक्रामकता बढ़ती है तो वह अपने समझौते की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगा।

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ऐसे में यमन, सऊदी अरब, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब केवल एक देश या एक मोर्चे तक सीमित नहीं रह सकता। अगर मक्का डिफेंस पैक्ट सक्रिय हुआ, तो मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति में पाकिस्तान और तुर्किये की सीधी सुरक्षा भूमिका जुड़ सकती है—और पूरे क्षेत्र में तनाव का दायरा तेजी से बढ़ सकता है।

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