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नेपाल में बड़ी कार्रवाई: 2006 से अब तक नेताओं और अफसरों की संपत्ति खंगालेगी हाई-पावर कमेटी

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अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 16 अप्रैल 2026

नेपाल सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाते हुए 2006 के बाद से नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन कर दिया है। यह फैसला कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे सीधे प्रधानमंत्री के वादों से जोड़ा जा रहा है।

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कोई सामान्य जांच नहीं बल्कि सत्ता, सिस्टम और सियासत में जमे ‘अघोषित धन’ की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश है। आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह 2006 के जनआंदोलन के बाद से लेकर वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे सभी बड़े नेताओं और अफसरों की संपत्ति का रिकॉर्ड खंगाले।

इस पांच सदस्यीय आयोग की अगुवाई पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस राजेन्द्र कुमार भंडारी को सौंपी गई है। उनके साथ पूर्व न्यायाधीश, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और वित्तीय विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं, ताकि जांच कानूनी, प्रशासनिक और आर्थिक तीनों स्तर पर मजबूत हो सके।

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब नेपाल में नेताओं की संपत्ति को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। हाल ही में मंत्रियों द्वारा घोषित संपत्ति के बाद सवाल उठने लगे थे कि आखिर इतनी दौलत आई कहां से। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक यह मांग तेज हो गई थी कि सिर्फ संपत्ति घोषित करने से काम नहीं चलेगा, उसके स्रोत भी सामने आने चाहिए।

राजनीतिक दलों ने भी इस जांच का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित होनी चाहिए। कई नेताओं का कहना है कि जांच के नाम पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, वरना यह अभियान अपनी विश्वसनीयता खो देगा।

सरकार के भीतर इसे “सिस्टम क्लीनिंग ऑपरेशन” के तौर पर देखा जा रहा है। संकेत साफ हैं—अब सिर्फ पुराने मामलों की फाइलें नहीं खुलेंगी, बल्कि उन सभी पर शिकंजा कसेगा जिन्होंने सत्ता में रहते हुए बेहिसाब संपत्ति बनाई।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जांच ईमानदारी से पूरी हुई, तो नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर यह भी पिछली जांचों की तरह अधूरी रह गई, तो जनता का भरोसा और गहराई से टूटेगा।

कुल मिलाकर, नेपाल की सियासत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है—जहां यह तय होगा कि भ्रष्टाचार पर सच में वार होगा या फिर यह भी एक और राजनीतिक ड्रामा बनकर रह जाएगा।

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