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नेपाल का स्वास्थ्य बजट: बढ़ते दावे, लेकिन जमीनी सच्चाई में बिखराव

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 16 अप्रैल 2026

नेपाल सरकार हर साल स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हालिया विश्लेषण यह साफ संकेत देता है कि बजट का बड़ा हिस्सा अब भी प्राथमिक जरूरतों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा। कागजों में योजनाएं व्यापक हैं, मगर जमीन पर स्वास्थ्य सेवाओं की हालत कई जगहों पर चिंताजनक बनी हुई है।

स्वास्थ्य बजट का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक खर्च, वेतन और ढांचागत परियोजनाओं में खर्च हो रहा है। अस्पतालों की इमारतें तो बन रही हैं, लेकिन उनमें डॉक्टरों, नर्सों और जरूरी उपकरणों की भारी कमी देखने को मिल रही है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह स्थिति और भी खराब है, जहां बुनियादी इलाज तक उपलब्ध नहीं है।

सरकार ने बीमा योजनाओं और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने का दावा किया है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ आम आदमी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा। कई जगहों पर मरीजों को अभी भी जेब से भारी खर्च करना पड़ रहा है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का आवंटन संतुलित नहीं है। रोकथाम (preventive care) और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा, जबकि इन्हीं क्षेत्रों में निवेश से लंबे समय में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसके विपरीत, अधिक फोकस बड़े अस्पतालों और शहरी परियोजनाओं पर देखा जा रहा है।

दवाओं और उपकरणों की खरीद में पारदर्शिता की कमी भी एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। कई मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

नेपाल के स्वास्थ्य बजट का यह विश्लेषण साफ करता है कि केवल बजट बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके सही उपयोग, पारदर्शिता और प्राथमिकता तय करने की जरूरत है। जब तक फंड का सीधा फायदा आम आदमी तक नहीं पहुंचेगा, तब तक स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के दावे अधूरे ही रहेंगे।

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