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इजरायली बस्तियों पर ब्रिटेन के बैन का अरब-मुस्लिम देशों ने किया स्वागत, दुनिया से भी कार्रवाई की अपील

अंतरराष्ट्रीय/मध्य-पूर्व | ABC NATIONAL NEWS | रियाद | 10 सितंबर 2026

सऊदी अरब समेत 8 देशों का बड़ा बयान—अवैध बस्तियों के विस्तार पर लगनी चाहिए रोक

सऊदी अरब समेत आठ अरब और मुस्लिम देशों ने ब्रिटेन के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसके तहत कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बनी इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह इसी तरह के ठोस कदम उठाए और वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों के लगातार विस्तार को रोकने के लिए कार्रवाई करे।

सऊदी अरब, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, कतर और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने कहा कि ब्रिटेन का फैसला दूसरे देशों को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप इसी तरह के कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

सिर्फ सामान पर रोक नहीं, जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की मांग

इन देशों ने यह भी मांग की कि इजरायली बस्तियों के विस्तार में शामिल संस्थाओं और व्यक्तियों को जवाबदेह बनाया जाए। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे कदम उठाने चाहिए जो उन गतिविधियों को रोकें, जिनसे कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में बस्तियों का विस्तार जारी रहता है।

ब्रिटेन ने एक दिन पहले अपनी इजरायल नीति में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान पर प्रतिबंध और बस्तियों के विस्तार में शामिल कंपनियों तथा लोगों पर प्रतिबंधों की घोषणा की थी।

इजरायल का जवाब—ईस्ट यरुशलम में ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास बंद

ब्रिटेन के फैसले पर इजरायल ने कड़ा जवाब दिया। इजरायल ने ईस्ट यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद करने की घोषणा की और 12 ब्रिटिश नागरिकों के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगा दी।

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ब्रिटेन ने यह कदम फ्रांस और कनाडा के साथ मिलकर उठाया है। दोनों देशों ने भी इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। इसके अलावा 12 देशों के एक समूह ने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

वेस्ट बैंक में 7.7 लाख से ज्यादा इजरायली बस्तीवासी

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के अधिकांश देश कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानते हैं। हालांकि इजरायल इस व्याख्या को स्वीकार नहीं करता।

ब्रिटिश सरकार के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, आज कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में करीब 7.7 लाख इजरायली बस्तीवासी रह रहे हैं। 1993 के ओस्लो समझौते के समय यह संख्या करीब 2.7 लाख थी।

वेस्ट बैंक में इजरायल के E1 प्रोजेक्ट को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। पिछले महीने वहां 1,200 से ज्यादा घरों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किए गए। ब्रिटेन और दूसरे देशों का कहना है कि यह परियोजना भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य के क्षेत्रों के बीच संपर्क को कमजोर कर सकती है।

सऊदी अरब समेत देशों ने दो-राष्ट्र समाधान पर दिया जोर

आठ देशों ने कहा कि गाजा भी कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना को पूरी तरह और तुरंत लागू करने की मांग की। साथ ही मानवीय स्थिति सुधारने, पुनर्निर्माण शुरू करने और स्थायी शांति की नींव रखने पर जोर दिया।

इन देशों ने दोहराया कि स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान ही सबसे व्यवहारिक रास्ता है। इसके तहत 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र, संप्रभु, एकजुट और व्यवहारिक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना तथा ईस्ट यरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की बात कही गई।

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अब सवाल—क्या ब्रिटेन का कदम दूसरे देशों के लिए मिसाल बनेगा?

ब्रिटेन के फैसले के बाद सऊदी अरब समेत आठ देशों का खुलकर समर्थन इस मुद्दे को और महत्वपूर्ण बना रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दूसरे देश भी इजरायली बस्तियों से जुड़े व्यापार पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाएंगे?

अगर ऐसा होता है, तो वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार को लेकर इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है। क्या यह दबाव इजरायल को अपनी settlement नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा, या इसके जवाब में इजरायल और पश्चिमी देशों के बीच टकराव और गहरा होगा?

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