राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 जून 2026
कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाज़ा युद्ध और फिलिस्तीन के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा सवाल उठाया है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने लेख “India Remains Silent on Gaza, the World Continues to Speak Up” में उन्होंने कहा कि गाज़ा में इज़रायल की सैन्य कार्रवाई पर भारत की लगातार चुप्पी न तो नैतिक रूप से उचित है और न ही राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से समझ में आने वाली है।
सोनिया गांधी ने लिखा कि अक्टूबर 2023 में हमास के हमले की निंदा की जानी चाहिए थी, लेकिन उसके बाद इज़रायल की सैन्य कार्रवाई ने जिस स्तर पर तबाही, नागरिक मौतों और मानवीय संकट को जन्म दिया है, उसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की जांच रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि गाज़ा में हजारों बच्चों सहित बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए हैं, लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के अनेक देशों ने इज़रायल की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, कई देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तथा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में भी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। इसके बावजूद भारत ने अपनी पारंपरिक विदेश नीति से हटकर ऐसी चुप्पी साध ली है, जो उसकी ऐतिहासिक भूमिका से मेल नहीं खाती।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि “मोदी सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता केवल नैतिक रूप से निंदनीय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित की दृष्टि से भी समझ से परे है। भारत धीरे-धीरे इज़रायल के रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र में खिसकता जा रहा है, जबकि दुनिया का बड़ा हिस्सा अब उससे दूरी बना रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़रायल यात्रा इतिहास में एक उलझन भरे रणनीतिक फैसले के रूप में दर्ज होगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से उपनिवेशवाद-विरोध, गुटनिरपेक्षता, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति का समर्थक रहा है। इसलिए फिलिस्तीन के प्रश्न पर भारत से अपेक्षा थी कि वह मानवीय मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में स्पष्ट आवाज़ उठाएगा। उनके अनुसार, गाज़ा में लाखों लोगों के विस्थापन और नागरिकों की मौत पर मौन रहना भारत की उस वैश्विक पहचान के अनुरूप नहीं है, जो वर्षों से न्याय और शांति की वकालत करती रही है।
सोनिया गांधी ने लेख के अंत में कहा कि भारत को गाज़ा में मानवीय संकट और फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों के पक्ष में पूरी दुनिया में उभर रहे जनमत का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत की विदेश नीति का आधार केवल रणनीतिक हित नहीं, बल्कि नैतिक नेतृत्व और मानवीय मूल्यों की रक्षा भी होना चाहिए।
सोनिया गांधी के इस लेख ने गाज़ा, इज़रायल और भारत की विदेश नीति पर राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। अब यह मुद्दा केवल कूटनीति का नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका, नैतिक जिम्मेदारी और विदेश नीति की दिशा पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।




