अंतरराष्ट्रीय/कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026
दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, वैश्विक संकट के बीच BRICS की अहम बैठक
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और संकट के बीच BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन इस सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में होने जा रहा है। सम्मेलन में BRICS सदस्य देशों और साझेदार देशों के कई बड़े नेता शामिल होंगे। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस प्रमुख नाम हैं। ऐसे समय में जब दुनिया पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव, ऊर्जा संकट और बड़े देशों के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से गुजर रही है, दिल्ली में होने वाली यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुतिन के दिल्ली पहुंचते ही मोदी से मुलाकात की संभावना
रूसी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार, 11 सितंबर की सुबह भारत पहुंच सकते हैं। उनके दिल्ली पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस मुलाकात में रक्षा और उससे जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में पुतिन और मोदी की बैठक पर सिर्फ BRICS ही नहीं, बल्कि अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के कई देशों की नजर रहेगी।
ईरान के राष्ट्रपति और UN प्रमुख भी होंगे मौजूद
BRICS सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मौजूदगी भी खास महत्व रखती है। पश्चिम एशिया में इस समय जारी तनाव और ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच उनका दिल्ली आना BRICS मंच को और महत्वपूर्ण बना देता है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस की मौजूदगी भी इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर खास बनाती है। दुनिया इस समय युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार तनाव और बदलती वैश्विक शक्ति-संतुलन जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में BRICS के मंच पर इन मुद्दों पर बातचीत की उम्मीद है।
भारत के लिए भी बड़ा कूटनीतिक मौका
भारत के लिए यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं है। दिल्ली में दुनिया के प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी भारत को एक साथ कई देशों के साथ बातचीत और अपने हितों को आगे बढ़ाने का मौका देती है।
खासकर रूस के साथ रक्षा संबंध, ईरान के साथ क्षेत्रीय और आर्थिक सहयोग तथा पश्चिमी देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंधों के बीच नई दिल्ली की कूटनीतिक भूमिका पर दुनिया की नजर है।
BRICS अब कितना बड़ा प्रभाव डाल पाएगा?
BRICS के विस्तार के बाद इसका महत्व पहले से बढ़ गया है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ रूस, चीन और दूसरे उभरते देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, BRICS खुद को वैश्विक दक्षिण की एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में पेश करता है।
लेकिन असली सवाल यही है—क्या BRICS सिर्फ बैठकों और बयानों तक सीमित रहेगा, या वैश्विक व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव ला पाएगा?
और सबसे अहम—मोदी-पुतिन की मुलाकात में रक्षा के अलावा क्या कोई ऐसा बड़ा फैसला सामने आएगा, जो भारत-रूस रिश्तों और बदलती वैश्विक राजनीति को नई दिशा दे?



