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2027 को लेकर चीन के ‘नास्त्रेदमस’ की डरावनी भविष्यवाणी: अमेरिका में गृहयुद्ध से लेकर आर्थिक तबाही तक 5 बड़े दावे

ABC NATIONAL NEWS | दुनिया | 11 सितंबर 2026

क्या 2027 दुनिया के लिए भारी पड़ेगा?

साल 2027 आने में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन चीन के एक प्रोफेसर की भविष्यवाणियां सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं। प्रोफेसर जियांग शुएछिन को उनके समर्थक चीन का ‘नास्त्रेदमस’ कहते हैं। उन्होंने अप्रैल में एक पॉडकास्ट में अमेरिका और दुनिया के भविष्य को लेकर कई गंभीर दावे किए थे। उनके अनुसार, अगर एक बड़ी विदेश नीति की गलती होती है, तो उसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह अमेरिका की राजनीति, सेना, अर्थव्यवस्था और समाज में एक के बाद एक संकट पैदा कर सकती है। हालांकि, इन बातों को भविष्यवाणी और उनका व्यक्तिगत आकलन ही माना जाना चाहिए; इन्हें भविष्य की पक्की घटना नहीं कहा जा सकता।

पहली भविष्यवाणी—पश्चिम एशिया का युद्ध और लंबी जंग

जियांग का दावा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में सिर्फ हवाई हमले निर्णायक नतीजा नहीं दे पाएंगे। उनके अनुसार, स्थिति इतनी बिगड़ सकती है कि अमेरिका को बड़े पैमाने पर जमीनी सैनिक उतारने पड़ें। इसके बाद अमेरिका एक लंबी और थका देने वाली जंग में फंस सकता है, जिसमें उसे जीत हासिल करना मुश्किल होगा। यह एक बड़ा दावा है, क्योंकि अगर ऐसा कोई घटनाक्रम होता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। तेल, व्यापार, समुद्री रास्ते और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।

दूसरा दावा—अमेरिका में फिर लागू हो सकती है अनिवार्य सैन्य भर्ती

प्रोफेसर जियांग की दूसरी भविष्यवाणी और भी चौंकाने वाली है। उनका कहना है कि अमेरिका को आने वाले समय में अनिवार्य सैन्य भर्ती की व्यवस्था फिर शुरू करनी पड़ सकती है। उनका अनुमान है कि 2027 तक इसके लिए कानूनी ढांचा तैयार किया जा सकता है और बड़ी संख्या में युवा अमेरिकियों को सेना में सेवा देने के लिए बुलाया जा सकता है। लेकिन अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए इसे केवल उनका अनुमान समझना चाहिए, न कि अमेरिका सरकार की घोषित नीति।

तीसरा दावा—आईसीई और नेशनल गार्ड की भूमिका बढ़ेगी

जियांग का अनुमान है कि अमेरिका के भीतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संघीय एजेंसियों की भूमिका और बढ़ सकती है। उनका दावा है कि आईसीई को ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं और बड़े शहरों में नेशनल गार्ड की तैनाती सामान्य होती जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिका में आव्रजन, कानून-व्यवस्था और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।

चौथा दावा—होर्मुज बंद हुआ तो दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है

सबसे महत्वपूर्ण भविष्यवाणियों में से एक वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर है। जियांग का कहना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद या बाधित रहा, तो तेल, गैस और खाद की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके बाद परिवहन और उत्पादन महंगा होगा, दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी और कई देशों में महंगाई तथा खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है। यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है।

पांचवां और सबसे डरावना दावा—अमेरिका में गृहयुद्ध जैसे हालात

जियांग ने अमेरिका में दूसरे गृहयुद्ध जैसे हालात बनने की भी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि लगातार दंगे, राजनीतिक तनाव और सामाजिक टकराव बढ़ते-बढ़ते ऐसी स्थिति पैदा कर सकते हैं जहां 2027 में उनके शब्दों में “गृहयुद्ध के लिए सभी परिस्थितियां” मौजूद होंगी। यह उनकी भविष्यवाणी है और इसके समर्थन में कोई निश्चित प्रमाण नहीं दिया गया है। अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण जरूर एक वास्तविक मुद्दा है, लेकिन उससे सीधे गृहयुद्ध होने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

एक संकट से दूसरा संकट—यही है पूरी थ्योरी

जियांग इन पांच घटनाओं को अलग-अलग भविष्यवाणियां नहीं मानते। उनकी पूरी थ्योरी एक चेन रिएक्शन पर आधारित है। यानी पश्चिम एशिया में युद्ध बढ़ेगा, अमेरिका उसमें ज्यादा फंसेगा, सैन्य दबाव बढ़ेगा, घरेलू तनाव बढ़ेगा, होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते प्रभावित होंगे, ऊर्जा कीमतें बढ़ेंगी और आखिरकार आर्थिक तथा सामाजिक संकट गहरा सकता है।

लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि भविष्यवाणी और भविष्य की सच्चाई एक चीज नहीं होती। जियांग के समर्थक उनके पुराने कुछ दावों को सही बताते हैं, लेकिन किसी व्यक्ति को ‘नास्त्रेदमस’ कह देना उसकी भविष्यवाणियों को वैज्ञानिक प्रमाण नहीं बना देता।

तो सवाल यह नहीं कि 2027 में सचमुच अमेरिका में गृहयुद्ध होगा या दुनिया की अर्थव्यवस्था टूट जाएगी। असली सवाल यह है—क्या आज दुनिया में ऐसे तनाव जरूर बढ़ रहे हैं, जिन्हें अगर समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो वे बड़े संकट में बदल सकते हैं?

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