अंतरराष्ट्रीय/कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 11 सितंबर 2026
2019 के बाद पहली भारत यात्रा, दिल्ली में मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर
चीन ने आखिरकार पुष्टि कर दी है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। यह करीब 7 साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। शी आखिरी बार अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए तमिलनाडु के मामल्लपुरम आए थे। अब दिल्ली में दोनों नेताओं की संभावित द्विपक्षीय मुलाकात को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार और रिश्तों को सामान्य करने पर बातचीत
शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री मोदी की BRICS सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है। इस बैठक में व्यापार, आर्थिक संबंधों और दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने से जुड़े मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। लंबे समय से भारत और चीन के रिश्तों में तनाव रहा है, ऐसे में दोनों नेताओं की आमने-सामने बातचीत यह संकेत दे सकती है कि दोनों देश संबंधों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।
BRICS सम्मेलन के दौरान चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेंटाओ और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बीच भी बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सात साल में बदले रिश्तों का पूरा दौर
2019 में मामल्लपुरम में मोदी और शी की मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में बड़ा बदलाव आया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा और रिश्तों पर उसका सीधा असर पड़ा। व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में संबंध जारी रहे, लेकिन राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों में विश्वास की कमी बनी रही।
अब करीब सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत आना ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए यह यात्रा केवल BRICS सम्मेलन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत-चीन संबंधों में संभावित नए दौर की शुरुआत के तौर पर भी देखी जा रही है।
भारत के सामने बड़ा सवाल—सिर्फ व्यापार या भरोसा भी?
भारत के लिए चीन के साथ व्यापार बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल भी उतने ही अहम हैं। इसलिए मोदी-शी मुलाकात में केवल व्यापार बढ़ाने की बात होगी या सीमा पर भरोसा बहाल करने और रिश्तों में वास्तविक सुधार की दिशा में भी कोई ठोस बातचीत होगी, इस पर सबकी नजर रहेगी।
अगर दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध बेहतर होते हैं, तो इसका फायदा दोनों अर्थव्यवस्थाओं को मिल सकता है। लेकिन भारत के लिए यह भी जरूरी होगा कि आर्थिक सहयोग के साथ सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता बनी रहे।
BRICS के मंच पर चीन-भारत की नई तस्वीर?
शी जिनपिंग की भारत यात्रा BRICS के लिए भी महत्वपूर्ण है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में मोदी और शी की मुलाकात दुनिया को यह संदेश दे सकती है कि भारत और चीन टकराव के बावजूद बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 7 साल बाद दिल्ली में मोदी-शी की मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक बैठक होगी, या भारत-चीन रिश्तों में सचमुच नई शुरुआत का रास्ता खुलेगा? क्या व्यापार बढ़ेगा, सीमा पर भरोसा लौटेगा और दोनों एशियाई ताकतें प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग का नया संतुलन बना पाएंगी?



