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मणिपुर हिंसा पर कांग्रेस का हमला, CM खेमचंद सिंह से इस्तीफा मांगा; नए चुनाव की मांग

उग्रवादी हमलों को रोकने में बीजेपी सरकार विफल, कांग्रेस ने उठाए सवाल; हत्याओं, गोलीबारी और आगजनी की समयबद्ध जांच कर दोषियों पर मुकदमा चलाने की मांग

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 अक्टूबर 2026

मणिपुर में दोबारा भड़की हिंसा को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से इस्तीफे की मांग करते हुए राज्य में नए चुनाव कराने की मांग उठाई है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार हिंसा रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल साबित हुई है।

रविवार, 25 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस सांसद और मणिपुर के प्रभारी सप्तगिरि उलाका ने राज्य की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नागरिकों पर हमला करने वाले किसी भी हथियारबंद समूह या व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण अथवा कानूनी कार्रवाई से छूट नहीं मिलनी चाहिए।

कांग्रेस ने सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मणिपुर में हिंसा की दोबारा वापसी राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था संभालने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्टी के मुताबिक, बीजेपी सरकार हिंसा को रोकने और लोगों के जीवन तथा संपत्ति की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।

कांग्रेस ने यह भी चिंता जताई कि हथियारबंद समूहों के पास सुरक्षा बलों से अधिक आधुनिक हथियार होने की बात सामने आ रही है। पार्टी ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए पूछा कि अगर आम नागरिकों पर हमले जारी हैं, तो सरकार उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठा पा रही है।

हालांकि, हथियारों की क्षमता को लेकर किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इस मुद्दे पर आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

हत्याओं और आगजनी की समयबद्ध जांच की मांग

कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका ने हत्याओं, गोलीबारी, आगजनी और आम नागरिकों की संपत्ति को नष्ट किए जाने के मामलों में समयबद्ध जांच की मांग की। पार्टी का कहना है कि हिंसा की हर घटना की जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि नागरिकों पर हमला करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन को राजनीतिक प्रभाव के आधार पर बचाया नहीं जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है।

मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय तनाव और हिंसा ने आम लोगों के जीवन, सुरक्षा और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल में कानून-व्यवस्था बहाल करना और लोगों का भरोसा कायम करना राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

मुख्यमंत्री ने किया SoO शिविर का निरीक्षण

इस बीच, मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने रविवार को मणिपुर के कांगपोकपी जिले में साइनाई शिविर का निरीक्षण किया। यह शिविर Suspension of Operations (SoO) समझौते के तहत नामित उग्रवादी शिविरों में शामिल है।

मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब राज्य में नए सिरे से हिंसा को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए विशेष कदमों या आगे की सुरक्षा योजना का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

विपक्ष की मांग है कि राज्य सरकार हिंसा रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों पर हमले करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई हो।

नए चुनाव की मांग से बढ़ा राजनीतिक दबाव

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ राज्य में नए चुनाव कराने की मांग भी की है। पार्टी का तर्क है कि मौजूदा सरकार हिंसा पर नियंत्रण रखने में विफल रही है, इसलिए उसे राजनीतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

हालांकि, इस्तीफे और नए चुनाव की मांग कांग्रेस का राजनीतिक रुख है। इसका कोई फैसला अभी सामने नहीं आया है। राज्य में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार हिंसा रोकने, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और आम लोगों की सुरक्षा बहाल करने के लिए क्या कदम उठाती है।

मणिपुर में शांति की बहाली केवल राजनीतिक बयानबाजी से संभव नहीं है। इसके लिए हिंसा की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कानूनी कार्रवाई, प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और भरोसा बहाल करने के ठोस प्रयास जरूरी हैं। फिलहाल, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।

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