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जातीय जनगणना पर सरकार का बड़ा फैसला, ओबीसी सूची से नहीं होगी जातियों की गिनती

2027 की जनगणना में लोग खुद बताएंगे अपनी जाति; सरकार का कहना—ओबीसी सूची में सिर्फ जातियां नहीं, कई तरह के सामाजिक वर्ग भी शामिल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 सितंबर 2026

सरकार ने ओबीसी सूची का इस्तेमाल क्यों छोड़ा?

2027 में देश की जनगणना होने वाली है और इसमें जातियों की गिनती भी की जाएगी। लेकिन सरकार ने जातियों की गिनती के लिए केंद्र और राज्यों की ओबीसी सूचियों का इस्तेमाल करने का विचार छोड़ दिया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ओबीसी की सूची में केवल जातियों के नाम नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग तरह के सामाजिक समूहों के नाम भी शामिल हैं। इसलिए सरकार को लगा कि इन सूचियों के आधार पर पूरे देश की जातियों की सही गिनती करना मुश्किल हो सकता है।

अब लोग खुद बताएंगे अपनी जाति

सरकार अब ऐसी व्यवस्था अपनाने जा रही है जिसमें जनगणना के दौरान लोगों से उनकी जाति पूछी जाएगी और वे अपनी जाति का नाम खुद बताएंगे। इसके लिए एक खुला कॉलम रखा जाएगा। यानी लोगों को पहले से बनी किसी छोटी सूची में से अपनी जाति चुनने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। वे अपनी जाति का नाम सीधे लिखवा सकेंगे। इसके बाद सरकार इन नामों को इकट्ठा करके आंकड़े तैयार करेगी।

एक जाति के कई नाम होने से आएगी मुश्किल

इस तरीके से सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती भी होगी। देश के अलग-अलग राज्यों और इलाकों में एक ही जाति के अलग-अलग नाम या बोलने के तरीके हो सकते हैं। कई जगह किसी समुदाय का स्थानीय नाम अलग हो सकता है। इसलिए जब करोड़ों लोगों की जानकारी जमा होगी तो सरकार को यह समझना होगा कि कौन-कौन से अलग नाम एक ही जाति से जुड़े हैं और कौन से वास्तव में अलग समुदाय हैं। यही काम जातीय जनगणना को मुश्किल और बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।

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2011 में 46 लाख से ज्यादा जाति नाम सामने आए थे

2011 में हुई सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना में भी इसी तरह बड़ी संख्या में जाति नाम सामने आए थे। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय 46 लाख से ज्यादा अलग-अलग जाति नाम दर्ज किए गए थे। अब विपक्षी नेताओं और कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 2027 में भी लोगों को खुले तौर पर अपनी जाति बताने का मौका दिया गया तो बड़ी संख्या में अलग-अलग नाम सामने आ सकते हैं। इसलिए सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि सरकार इन सभी नामों को बाद में किस तरह व्यवस्थित करेगी।

जाति की गिनती का असर आरक्षण पर भी पड़ सकता है

जातियों की सही संख्या का आंकड़ा केवल जनगणना तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर आने वाले समय में आरक्षण, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसलों पर भी पड़ सकता है। अलग-अलग समुदाय लंबे समय से अपनी आबादी के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी और सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। ऐसे में 2027 की जातीय जनगणना से मिलने वाले आंकड़े भविष्य की राजनीति और सरकारी नीतियों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अब असली परीक्षा आंकड़े तैयार करने की होगी

सरकार का कहना है कि ओबीसी सूचियां पूरी तरह जातियों की सूची नहीं हैं, इसलिए उन्हें सीधे जनगणना का आधार बनाना सही नहीं होगा। लेकिन खुले कॉलम में लोगों से जाति पूछने के बाद भी सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी। लाखों अलग-अलग नामों को सही तरीके से समझना, एक जैसे नामों को एक साथ रखना और सही आंकड़ा तैयार करना आसान काम नहीं होगा। इसलिए 2027 की जनगणना में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि जाति गिनी जाएगी या नहीं, बल्कि यह होगा कि देश की जातियों की गिनती कितनी सही और साफ तरीके से की जाती है।

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