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ईरान का पलटवार, ट्रंप की खुली धमकी: जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला, बोले—‘जोरदार जवाब देंगे’

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 1 सितंबर | 2026

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि “हम उन्हें जोरदार तरीके से मारेंगे।” यह टकराव अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद सामने आया। ईरान का कहना है कि उसने जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।

ईरान के मुताबिक उसके हमलों में जॉर्डन स्थित किंग हुसैन और अल-अज़्रक एयरबेस शामिल थे, जहां अमेरिकी सैन्य बल मौजूद हैं। ईरान के अर्ध-सरकारी समाचार संगठन तस्नीम के अनुसार इन हमलों में ठिकानों को “महत्वपूर्ण नुकसान” पहुंचा है। दूसरी ओर, अमेरिका की कार्रवाई लारक द्वीप पर केंद्रित थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक वहां ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया गया, जिनके बारे में अमेरिका का दावा था कि उनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें तैनात करने के लिए किया जा सकता था।

लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने इसे “आक्रामकता का कृत्य” करार दिया। ईरान की ओर से कहा गया कि अमेरिकी हमले में उसके सैनिकों और नागरिकों को नुकसान पहुंचा। तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती तौर पर दो लोगों की मौत और दो लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि बाद में घायलों में से एक की अस्पताल में मौत होने के बाद लारक द्वीप हमले में मृतकों की संख्या तीन बताई गई।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां किसी बड़े सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को रॉकेट के जरिए समुद्र में माइंस तैनात करने की तैयारी करते देखा था। इसी आशंका के आधार पर लारक द्वीप पर कार्रवाई को अमेरिका ने सीमित और सटीक सैन्य अभियान बताया है।

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अमेरिका के MQ-9 ड्रोन को होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में मार गिराया। ईरानी पक्ष ने इसे अपनी नई और उन्नत वायु रक्षा प्रणाली की कार्रवाई बताया है। हालांकि ऐसे युद्धकालीन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल संभव नहीं है।

इसी बीच ट्रंप प्रशासन के रुख से साफ संकेत मिल रहे हैं कि वॉशिंगटन फिलहाल पीछे हटने के बजाय दबाव बढ़ाने की रणनीति पर चल रहा है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट को ईरान के लिए संदेश बताया है। ट्रंप ने खार्ग द्वीप को लेकर एक एआई-निर्मित वीडियो के साथ बेहद आक्रामक संदेश पोस्ट किया था। हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि हालिया रात के हमलों में अमेरिकी सेना ने खार्ग द्वीप को निशाना नहीं बनाया था। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप की पोस्ट को खारिज करते हुए उसे हास्यास्पद बताया।

खार्ग द्वीप का नाम सामने आना इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध से पहले ईरान के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात को संभालने वाला यह प्रमुख केंद्र था। अगर इस क्षेत्र के आसपास संघर्ष और बढ़ता है, तो ईरान की ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात क्षमता पर बड़ा असर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी इसका दबाव पड़ने की आशंका है।

तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक रूपरेखा पर बातचीत होने की खबर है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका फिलहाल किसी तत्काल राजनयिक समझौते की ओर बढ़ने के बजाय ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखना चाहता है। इससे संघर्ष के लंबा खिंचने और क्षेत्र में नए मोर्चे खुलने की आशंका बनी हुई है।

इसी बीच रूस, चीन और ईरान के नेता शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर आमने-सामने हैं। इस बैठक में केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि अमेरिकी प्रतिबंधों, आर्थिक दबाव और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान भी मध्यस्थता की कोशिशों में भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। ऐसे में SCO की बैठक युद्ध के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बन गई है।

उधर पश्चिमी तट में भी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। एक इजरायली शांति कार्यकर्ता ने पश्चिमी तट में हिंसा की मौजूदा स्थिति को “सबसे हिंसक दौरों में से एक” बताया है। इजरायली बस्तियों से जुड़े हमलों और फिलिस्तीनी समुदायों के विस्थापन को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी गंभीर चिंता जताई है।

गाजा में भी हमले जारी हैं। इजरायली सेना ने गाजा सिटी में हवाई हमले के दौरान हमास के एक कमांडर के मारे जाने का दावा किया है। दूसरी ओर, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद से इजरायली हमलों में कम से कम 1,300 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इन आंकड़ों और सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।

कुल मिलाकर पश्चिम एशिया में घटनाक्रम बेहद तेजी से बदल रहा है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमला, ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार, MQ-9 ड्रोन गिराए जाने का ईरानी दावा और ट्रंप की जवाबी हमले की धमकी—ये घटनाएं संकेत दे रही हैं कि अमेरिका-ईरान टकराव फिर बड़े सैन्य संकट में बदल सकता है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि दोनों देश इस टकराव को सीमित रखते हैं या होर्मुज से लेकर पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष का दायरा और फैलता है।

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