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चीन और नेपाल में कुदरत के कहर पर भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/काठमांडू | 27 अगस्त 2026

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है और इसका असर नेपाल-चीन सीमा से लगे तिब्बत तक भी दिखाई दे रहा है। नेपाल के रासुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने गांवों, बाजारों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। वहीं चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग इलाके में भी बड़े भूस्खलन से जान-माल का नुकसान हुआ है।

अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार नेपाल में 95 और तिब्बत में कम से कम 3 लोगों की मौत हुई है। यानी दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या कम से कम 98 हो चुकी है। हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

तिब्बत में भी भारी तबाही

नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भारी भूस्खलन ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ग्यिरोंग पोर्ट के आसपास मलबा फैल गया और कई इमारतें तथा बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ।

सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा है। सीमा क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश और राहत कार्यों में पूरी ताकत लगाने के निर्देश दिए हैं।

चीन ने प्रभावित क्षेत्र में पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के करीब 145 अधिकारियों और जवानों को भेजा है। ड्रोन और अन्य निगरानी साधनों की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र भी राहत अभियान में जुटा

संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल और चीन में हुई इस आपदा पर गंभीर चिंता जताई है। UN के अनुसार नेपाल में करीब 10,000 परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत है। बाढ़ से बस्तियां, बाजार, सड़कें, पुल और जलविद्युत ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है तथा कई इलाकों में बिजली और संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है।

UN की मानवीय एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर राहत कार्यों में जुट गई हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम प्रभावित इलाकों में आपात खाद्य सामग्री और लॉजिस्टिक सहायता दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चिकित्सा किट, टेंट और अन्य जरूरी सामग्री के साथ मौके पर मौजूद है।

UNICEF गुरुवार से राहत सामग्री लेकर अपनी टीमें और वाहन प्रभावित इलाकों में भेजने की तैयारी कर रहा है। UNDP डेटा प्रबंधन और स्वयंसेवकों की सहायता उपलब्ध करा रहा है, जबकि UN की टीमें प्रभावित क्षेत्र की सैटेलाइट तस्वीरें और विश्लेषण जुटाने में मदद कर रही हैं।

संकट में फंसे भारतीयों के लिए भारत सक्रिय

आपदा के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा और सहायता को प्राथमिकता देते हुए नेपाल और चीन दोनों के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय नागरिकों की स्थिति का पता लगाने तथा जरूरत पड़ने पर उनकी सुरक्षित निकासी के लिए समन्वय कर रहा है।

चीन/तिब्बत के लिए हेल्पलाइन

स्थानीय चीनी अधिकारियों से संपर्क:
0086 139 8999 0012

भारतीय दूतावास, बीजिंग:
0086 185 1428 4905
इस नंबर पर WhatsApp के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।

नेपाल के लिए हेल्पलाइन

भारतीय दूतावास, काठमांडू:
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500

इन दोनों नंबरों पर भी WhatsApp के जरिए संपर्क किया जा सकता है।

भारत की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क से बाहर होने की खबरों ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।

133 भारतीय पर्यटक संपर्क से बाहर

नेपाली अधिकारियों के मुताबिक करीब 398 पर्यटक और अन्य लोग फिलहाल संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें 133 भारतीय नागरिक और 59 नेपाली नागरिक शामिल हैं। हालांकि नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन्हें अभी आधिकारिक रूप से लापता नहीं कहा जा रहा है।

नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार संभव है कि कई लोग बाढ़ और भूस्खलन से बचने के लिए ऊंचे या सुरक्षित इलाकों में चले गए हों और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा हो।

संपर्क से बाहर लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा, लांगटांग ट्रेक और गोसाईंकुंड ट्रेक पर गए पर्यटकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

भारत में भी हाई अलर्ट

नेपाल में आई बाढ़ का सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्यों पर पड़ने की आशंका है। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

NDRF की टीमें बिहार में तैनात की गई हैं। पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर समेत संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। गंडक नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती तैयारियां तेज कर दी हैं।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराजगंज और कुशीनगर समेत सीमावर्ती जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल यानी SSB ने भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी सीमा पर अपनी सभी संरचनाओं को अलर्ट किया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए 18 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें सात टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।

भारत ने नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और नेपाल को हरसंभव मानवीय एवं राहत सहायता देने का भरोसा दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी नेपाल में हुई जनहानि पर दुख जताते हुए कहा कि भारत नेपाल सरकार के राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग के लिए तैयार है।

भारतीय वायुसेना ने भी राहत सामग्री भेजने की तैयारी की है। C-130 विमान हिंडन एयरबेस से राहत सामग्री लेकर रवाना होने वाला है, जबकि C-17 विमान अगले दिन अतिरिक्त राहत सामग्री के साथ नेपाल जाने की तैयारी में है।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा का असर केवल नेपाल तक सीमित नहीं है। नेपाल और तिब्बत में तबाही के बाद भारत भी अपने नागरिकों की सुरक्षा, सीमावर्ती राज्यों की तैयारी और पड़ोसी देश नेपाल को मानवीय सहायता देने के मोर्चे पर सक्रिय हो गया है।

फिलहाल प्राथमिकता लापता लोगों का पता लगाना, भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों को संभावित बाढ़ से सुरक्षित रखना है। हालात लगातार बदल रहे हैं और राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ आपदा का वास्तविक पैमाना और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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