राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | अयोध्या | 12 अगस्त 2026
राम मंदिर CEO के लिए चयन प्रक्रिया चर्चा में
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अब एक नए विवाद के कारण चर्चा में है। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 5,200 आवेदनों में से शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों से इंटरव्यू से पहले 34 सवालों वाला एक Google Form भरवाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फॉर्म में प्रशासनिक और पेशेवर अनुभव से जुड़े सवालों के साथ उम्मीदवारों की धार्मिक मान्यताओं, खान-पान और व्यक्तिगत धार्मिक आचरण से जुड़े सवाल भी शामिल थे।
‘शिखा रखते हैं? जनेऊ पहनते हैं?’
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि उम्मीदवारों से पूछा गया कि क्या वे शिखा रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं, शुद्ध शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन करते हैं, शराब का सेवन करते हैं या नहीं और क्या वे खुद को ‘पक्का हिंदू’ मानते हैं। इसके अलावा यह भी पूछा गया कि क्या वे हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुरूप वस्त्र पहनने में सहज होंगे।
इन सवालों के साथ उम्मीदवारों से उनकी नौकरी, बड़े समूहों को संभालने के अनुभव, नेतृत्व क्षमता, परिवार और भगवान राम के प्रति उनकी आस्था के बारे में भी जानकारी मांगी गई। हालांकि, इन सवालों की आधिकारिक प्रश्नावली सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है और रिपोर्ट में इनका विवरण सूत्रों के हवाले से दिया गया है।
5,200 आवेदनों में से 18 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट
CEO पद के लिए कथित तौर पर लगभग 5,200 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें से 18 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया। सभी 18 उम्मीदवारों का पहले ऑनलाइन इंटरव्यू हुआ था। मंगलवार को इनमें से आठ उम्मीदवारों का आमने-सामने इंटरव्यू हुआ, जिनमें चार पूर्व IAS अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार से करीब एक से दो घंटे तक बातचीत हुई। चयन प्रक्रिया में प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व, धार्मिक-सामाजिक जुड़ाव और मंदिर के भविष्य के लिए उम्मीदवार की दृष्टि को परखने की बात कही गई है।
CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का CEO मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उसके जिम्मे वैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करना, वित्तीय प्रबंधन, बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं तैयार करना, सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय तथा धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के सुचारु संचालन जैसी जिम्मेदारियां होंगी।
इसी वजह से CEO पद के लिए प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय समझ, नेतृत्व क्षमता, बड़े स्तर पर भीड़ प्रबंधन और संकट से निपटने का अनुभव स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
धार्मिक आस्था की जांच पर उठ सकता है सवाल
लेकिन यदि किसी प्रशासनिक पद के लिए उम्मीदवार की निजी धार्मिक आदतों—जैसे वह मांस खाता है या नहीं, शराब पीता है या नहीं, जनेऊ पहनता है या नहीं—को चयन का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाता है, तो इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। खासकर तब, जब पद की मूल जिम्मेदारियां प्रशासन, वित्त, सुरक्षा और संस्थागत प्रबंधन से जुड़ी हों।
किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था और निजी जीवन निश्चित रूप से उसका व्यक्तिगत विषय हो सकते हैं। वहीं किसी धार्मिक संस्था के प्रशासनिक पद के लिए संस्था की परंपराओं और कार्य-संस्कृति की समझ को प्रासंगिक माना जा सकता है। लेकिन दोनों के बीच सीमा कहां खींची जाए, यही इस चयन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण सवाल बन सकता है।
दान में गड़बड़ी के आरोपों के बाद बनाया जा रहा है पूर्णकालिक CEO
CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय लिया गया है जब राम मंदिर ट्रस्ट के दान और वित्तीय प्रबंधन को लेकर आरोप सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन आरोपों के बाद ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज की जांच और निगरानी को लेकर सवाल उठे तथा कई अधिकारियों ने अपने पद छोड़े। इसी पृष्ठभूमि में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को संस्थागत और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसे समय में CEO से सबसे बड़ी अपेक्षा पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था, मजबूत प्रशासनिक निगरानी और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए कुशल प्रबंधन की होगी।
चयन समिति में कौन-कौन?
रिपोर्ट के अनुसार CEO चयन के लिए बनाई गई समिति में पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे शामिल हैं। समिति को तीन नामों का चयन करके उन्हें ट्रस्ट के सामने भेजना है। इसके बाद ट्रस्ट अंतिम तीन उम्मीदवारों में से CEO का चयन करेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रक्रिया 2 सितंबर तक पूरी किए जाने की योजना है और उसी दिन ट्रस्ट की कार्यकारी समिति की बैठक प्रस्तावित है।
कौन हैं संभावित उम्मीदवार?
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय का नाम संभावित उम्मीदवारों में बताया गया है। वह उत्तर प्रदेश पुलिस में IG के पद पर रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश्वर मिश्रा का नाम भी चर्चा में है, हालांकि उन्होंने अपनी शॉर्टलिस्टिंग की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल—CEO चुनेगा प्रशासन या आस्था?
राम मंदिर जैसे विशाल और संवेदनशील धार्मिक संस्थान के लिए सक्षम प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन CEO पद की चयन प्रक्रिया में व्यावसायिक योग्यता और निजी धार्मिक आस्था के बीच संतुलन कितना रखा गया है, यह सवाल महत्वपूर्ण है।
अगर धार्मिक परंपराओं की समझ को संस्था की कार्यप्रणाली से जुड़े एक पहलू के रूप में देखा गया है, तो उसका औचित्य अलग हो सकता है। लेकिन यदि किसी उम्मीदवार की योग्यता तय करने में यह महत्वपूर्ण हो जाए कि वह मांस खाता है या नहीं, जनेऊ पहनता है या नहीं या खुद को कितना ‘पक्का हिंदू’ मानता है, तो चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राम मंदिर का CEO आखिरकार मंदिर की आस्था और परंपराओं का सम्मान करने वाला प्रशासक होना चाहिए—लेकिन उसके चयन की कसौटी प्रशासनिक क्षमता, ईमानदारी, पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और नेतृत्व क्षमता होनी चाहिए। निजी आस्था की परीक्षा और पेशेवर योग्यता की परीक्षा के बीच की यह रेखा जितनी स्पष्ट होगी, उतना ही इस प्रतिष्ठित पद की गरिमा और चयन प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होगा।




