राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों पर अपनी अलग मुहिम चला रहे हैं और अब उसका अगला बड़ा पड़ाव उत्तराखंड की राजधानी देहरादून होगा। राहुल गांधी 17 जुलाई को ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत देहरादून में जनसभा करेंगे। इस अभियान के जरिए कांग्रेस केंद्र सरकार पर पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार हमलावर है। राहुल गांधी एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाएंगे।
देहरादून कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। राहुल ने सवाल किया, “मोदी जी, क्या आप घबरा गए हैं?” उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और युवाओं का भविष्य आज देश का सबसे बड़ा मुद्दा है।
उधर, जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के आंदोलन में राहुल गांधी के नहीं पहुंचने पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में वांगचुक ने कहा था कि यदि विपक्ष के बड़े नेता जनता के वास्तविक मुद्दों पर साथ नहीं आएंगे तो लोग उन्हें स्वीकार नहीं करेंगे।
इस पूरे विवाद पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चर्चा इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि कौन आंदोलन स्थल पर आया और कौन नहीं। उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत क्यों नहीं कर रही और शिक्षा मंत्री अब तक जवाबदेह क्यों नहीं ठहराए गए।
कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी ने भी राहुल गांधी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई देशभर में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है। उनका कहना है कि राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान और सोनम वांगचुक का आंदोलन एक ही मुद्दे की अलग-अलग लड़ाइयां हैं, इन्हें प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस का यह भी आरोप है कि देहरादून में राहुल गांधी की सभा के लिए पहले अनुमति देने के बाद प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल बदल दिया। पार्टी ने इसे सरकार का दबाव बताया, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक ड्रामा करने का आरोप लगाया।
इस बीच सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 18वें दिन भी जारी है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है और आंदोलनकारी 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ‘चलो संसद’ मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं।
छात्रों और युवाओं के मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल कांग्रेस अपनी अलग राजनीतिक मुहिम चला रही है, जबकि सोनम वांगचुक का आंदोलन अपने स्वतंत्र मंच से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
सोनम वांगचुक का दोहरा चरित्र: ‘अराजनीतिक’ का ढोंग और राहुल गांधी की राह तकना




