Home » National » LAC पर चरवाहों की वापसी की मांग, लद्दाख के ग्रामीणों ने संसदीय समिति से कहा- सीमावर्ती इलाकों में हमारी मौजूदगी भी देश की सुरक्षा

LAC पर चरवाहों की वापसी की मांग, लद्दाख के ग्रामीणों ने संसदीय समिति से कहा- सीमावर्ती इलाकों में हमारी मौजूदगी भी देश की सुरक्षा

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास रहने वाले ग्रामीणों ने वर्ष 2020 में चीन के साथ सीमा तनाव के बाद पारंपरिक चरागाहों तक पहुंच बंद होने का मुद्दा संसदीय समिति के सामने उठाया है। ग्रामीणों का कहना है कि चरागाहों तक पहुंच रुकने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है और सरकार को सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से नियंत्रित तरीके से उन्हें फिर से वहां जाने की अनुमति देनी चाहिए।

संसद की पर्यटन, परिवहन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति के लद्दाख दौरे के दौरान एलएसी से सटे मान पैंगोंग ए और बी गांवों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने समिति से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद स्थानीय चरवाहों की पारंपरिक चरागाहों तक पहुंच बंद हो गई। इससे खानाबदोश पशुपालकों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि वे वर्षों से इन्हीं क्षेत्रों में अपने पशुओं को चराते रहे हैं।

पूर्व पार्षद कोंचोक स्टानजिन ने बताया कि ग्रामीणों ने संसदीय समिति से अनुरोध किया है कि सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर स्थानीय पशुपालकों को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से पारंपरिक चरागाहों तक पहुंच की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की लगातार मौजूदगी केवल आजीविका का सवाल नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों का कहना है कि सीमा से लगे गांवों में लोगों का रहना और नियमित गतिविधियां जारी रहना देश के हित में है। उनका मानना है कि स्थानीय समुदाय इन दुर्गम इलाकों में भारत की उपस्थिति को मजबूत बनाते हैं और सीमाई क्षेत्रों की निगरानी में भी अप्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इसके बाद कई पारंपरिक चराई क्षेत्रों तक स्थानीय लोगों की पहुंच सीमित हो गई। अब ग्रामीण चाहते हैं कि सुरक्षा से समझौता किए बिना ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे उनकी आजीविका भी सुरक्षित रहे और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय आबादी की मौजूदगी भी बनी रहे।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted