अंतरराष्ट्रीय/अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 15 जुलाई 2026
चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार लगातार धीमी पड़ रही है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी वृद्धि दर 4.3% रही। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन है और चीन सरकार के 4.5% से 5% के वार्षिक लक्ष्य से भी नीचे है।
पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 5% की दर से बढ़ी थी, लेकिन दूसरी तिमाही में इसमें स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई। यह वर्ष 2022 के बाद सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि है, जब चीन कोविड-19 महामारी के कड़े प्रतिबंधों से जूझ रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की अर्थव्यवस्था इस समय कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती, घरेलू मांग में कमी, कमजोर उपभोक्ता खर्च और रोजगार बाजार में बढ़ती मुश्किलें प्रमुख हैं। इन कारणों से आर्थिक गतिविधियों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
चीन में लंबे समय से रियल एस्टेट क्षेत्र आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में निवेश और बिक्री दोनों में गिरावट आई है। इसके साथ ही लोग खर्च करने के बजाय बचत पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिससे घरेलू बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है।
रोजगार का मोर्चा भी सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। खासकर युवाओं के बीच रोजगार के अवसर सीमित होने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। यही वजह है कि चीन सरकार पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए प्रोत्साहन पैकेज और नीतिगत कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि दूसरी तिमाही के कमजोर आंकड़े संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में चीन सरकार ब्याज दरों में राहत, निवेश बढ़ाने और घरेलू खपत को प्रोत्साहित करने जैसे कदम उठा सकती है।
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले चीन की सुस्त होती विकास दर का असर वैश्विक व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजिंग सरकार की आर्थिक नीतियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।




