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TMC में बगावत के बीच ममता बनर्जी का शक्ति प्रदर्शन, अभिषेक के समर्थन में बोलीं- जरूरत पड़ी तो पार्टी फिर से खड़ी करूंगी

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 15 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती बगावत के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बुधवार को अपने भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया। फेसबुक पर जारी वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को “गद्दार” बताते हुए जनता से उनकी ओर से माफी मांगी और कहा कि जरूरत पड़ी तो वह टीएमसी को फिर से शून्य से खड़ा कर देंगी।

ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार ने कभी राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए समझौता नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्रीय जांच एजेंसियों और पुलिस का इस्तेमाल कर उनकी पार्टी में टूट कराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि वह इन चुनौतियों से डरने वाली नहीं हैं और अंत तक लड़ाई लड़ेंगी।

टीएमसी प्रमुख ने हाल के दिनों में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों ने निजी स्वार्थ के कारण पार्टी का साथ छोड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कारण यदि जनता को ठेस पहुंची है तो वह उनकी ओर से माफी मांगती हैं।

ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में पूर्व मंत्री मदन मित्रा के पार्टी छोड़ने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का समन मिलने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया।

भावुक अंदाज में ममता बनर्जी ने कहा, “वे चाहते थे कि मुझे हार्ट अटैक आ जाए, लेकिन मैं तब तक जिंदा रहूंगी, जब तक उनका अंत नहीं देख लेती।” उन्होंने यह भी कहा कि वह “शेर की तरह लड़ रही हैं” और किसी भी दबाव के आगे झुकेंगी नहीं।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में टीएमसी के कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व, विशेषकर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पार्टी से दूरी बनाई है। ऐसे समय में ममता बनर्जी का यह बयान साफ संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व अभिषेक बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है और आंतरिक असंतोष के बावजूद संगठन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है।

टीएमसी के भीतर जारी इस राजनीतिक हलचल को पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस संकट से किस तरह उबरती है और बागी नेताओं के कदम का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

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