अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | ताइपे | 6 जुलाई 2026
चीन से बढ़ते सैन्य और सुरक्षा खतरे के बीच ताइवान ने करीब 25 साल बाद अपनी सैन्य अकादमियों के स्नातकों के लिए ‘कम्युनिस्ट विरोधी’ देशभक्ति कक्षाएं दोबारा शुरू कर दी हैं।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि यह फैसला चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ताइवान में कथित घुसपैठ की कोशिशों को देखते हुए लिया गया है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल के समय में चीन की ओर से ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। इसके साथ ही चीन के नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी में भी लगातार इजाफा देखा गया है। इसी कारण सैन्य अधिकारियों को नए सुरक्षा माहौल के लिए तैयार करने की जरूरत महसूस की गई।
शीत युद्ध के दौर में ताइवान में ऐसी देशभक्ति कक्षाएं आम बात थीं। उस समय चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ सैनिकों और युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। लेकिन लगभग 25 वर्ष पहले यह कार्यक्रम बंद कर दिया गया था।
अब बदलते हालात को देखते हुए ताइवान ने इसे फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इन कक्षाओं का उद्देश्य सैन्य अधिकारियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और चीन से जुड़े संभावित खतरों के बारे में जानकारी देना है।
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उसने कभी भी ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। दूसरी ओर, ताइवान खुद को एक अलग और लोकतांत्रिक शासन वाला क्षेत्र मानता है।
पिछले कुछ वर्षों में ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। चीन अक्सर युद्धपोत और लड़ाकू विमान ताइवान के आसपास भेजता रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ है।
ऐसे माहौल में ताइवान का यह कदम उसकी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चीन और ताइवान के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका बनी रह सकती है।




