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टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों पर जल्द फैसला, मानसून सत्र से पहले स्पीकर का बड़ा निर्णय संभव

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 जुलाई 2026

संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों से जुड़े मामलों पर बड़ा फैसला सुना सकते हैं। यह फैसला दल-बदल कानून, सांसदों की सदस्यता और लोकसभा में उनकी बैठने की व्यवस्था से जुड़ा होगा।

टीएमसी के 29 में से 20 सांसद पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो चुके हैं। इन सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने की इच्छा भी जताई है। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसदों में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।

टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) दोनों ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि बागी सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया जाए। दोनों दलों का कहना है कि केवल विधायी दल का टूटना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानूनी रूप से मान्य विलय के बिना सांसदों को संरक्षण नहीं मिल सकता।

स्पीकर के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन सांसदों का दावा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत वैध माना जाएगा या उनकी सदस्यता रद्द होगी। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि संसद में इन सांसदों की बैठने की व्यवस्था क्या होगी।

लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र के लिए नई सीटिंग व्यवस्था पर भी काम कर रहा है। इसमें टीएमसी के बागी सांसदों, शिंदे गुट के सांसदों और डीएमके की अलग बैठने की मांग पर भी फैसला लिया जाना है।

लोकसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होना है। ऐसे में स्पीकर का फैसला संसद की राजनीतिक तस्वीर और विपक्ष की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

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