राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 27 मई 2026
कर्नाटक की राजनीति इस समय बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बुधवार को मीडिया से सिर्फ एक लाइन में कहा — “मैं कल बोलूंगा।” उनके इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बयान ने राज्य की राजनीति में अटकलों का तूफान खड़ा कर दिया है। माना जा रहा है कि गुरुवार को होने वाली कैबिनेट सहयोगियों के साथ उनकी नाश्ते की बैठक के बाद कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन को लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है।
दिल्ली दौरे से लौटने के बाद यह पहली बार था जब सिद्धारमैया मीडिया के सामने आए। लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने या नेतृत्व परिवर्तन से जुड़े किसी भी सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए केवल अगले दिन बोलने की बात कही। वे बेंगलुरु में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। उनके साथ सामाजिक कल्याण मंत्री H.C. Mahadevappa, आवास मंत्री Zameer Ahmed Khan और कानूनी सलाहकार A.S. Ponnanna भी मौजूद थे।
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 28 मई को कांग्रेस विधायक दल (CLP) की अहम बैठक हो सकती है, जिसमें सिद्धारमैया के संभावित उत्तराधिकारी के नाम पर फैसला लिया जा सकता है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही नेतृत्व की खींचतान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।
दरअसल 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस के भीतर “ढाई-ढाई साल” वाले फार्मूले की चर्चा लगातार होती रही है। उस समय डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे, लेकिन पार्टी हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया था। बदले में शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद और भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन का आश्वासन दिए जाने की चर्चाएं लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में चलती रही हैं।
इस बीच भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया है। B.Y. Vijayendra ने दावा किया है कि कर्नाटक जल्द मध्यावधि चुनाव की ओर बढ़ सकता है। वहीं कांग्रेस के कुछ नेता खुलकर सिद्धारमैया के समर्थन में उतर आए हैं। कांग्रेस विधायक Lakhan Jarkiholi ने यहां तक कह दिया कि यदि सिद्धारमैया को हटाया गया तो कांग्रेस “बर्बाद” हो जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे बदलाव को बेहद सावधानी से संभालना चाहता है ताकि पार्टी में टूट या खुला विद्रोह न हो। सिद्धारमैया का पिछड़े वर्गों और ग्रामीण वोटरों में मजबूत प्रभाव है, जबकि डीके शिवकुमार को संगठन और संसाधन प्रबंधन का मजबूत चेहरा माना जाता है। ऐसे में हाईकमान दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर सत्ता हस्तांतरण की रणनीति तैयार कर रहा है।
अब सबकी निगाहें गुरुवार सुबह होने वाली उस नाश्ते की बैठक और उसके बाद आने वाले राजनीतिक संदेश पर टिक गई हैं। यदि सिद्धारमैया इस्तीफे का ऐलान करते हैं, तो कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का दूसरा अध्याय शुरू हो सकता है और डीके शिवकुमार की ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है।




