राजनीति | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 27 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। Kakoli Ghosh Dastidar ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके साथ छह विधायकों के भी BJP में शामिल होने की खबर ने मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और TMC नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका पैदा कर दिया है। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई हलचल और सत्ता समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक TMC विधायक Anisur Rahman Biswas, Beena Mondal, Mohammad Abdul Matin और बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक भी इस राजनीतिक बदलाव का हिस्सा बने। सबसे बड़ी राजनीतिक चर्चा इस बात को लेकर है कि ये सभी नेता कथित तौर पर भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुए, जिसके बाद उनके BJP में जाने की खबरों ने जोर पकड़ लिया।
काकोली घोष दस्तीदार लंबे समय से TMC का प्रमुख चेहरा मानी जाती रही हैं। उनके अचानक इस्तीफे ने यह संकेत दिया है कि बंगाल की राजनीति में अंदरूनी असंतोष लगातार बढ़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि TMC के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों का यह पलायन जारी रहता है तो इसका सीधा असर आने वाले चुनावों और पार्टी की संगठनात्मक ताकत पर पड़ सकता है।
भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को बंगाल में “राजनीतिक परिवर्तन” का संकेत बता रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि राज्य में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता TMC सरकार से नाराज हैं और अब भाजपा को विकल्प के रूप में देख रहे हैं। वहीं TMC खेमे ने इन घटनाओं को “राजनीतिक दबाव और एजेंसियों की राजनीति” से जोड़ते हुए भाजपा पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह घटनाक्रम केवल कुछ नेताओं के दल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक जमीन का संकेत भी हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने बंगाल में अपना जनाधार तेजी से बढ़ाया है और अब पार्टी TMC के भीतर सेंध लगाकर संगठनात्मक बढ़त हासिल करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल शुरुआत है या आने वाले दिनों में TMC को और बड़े झटके लग सकते हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ती उठापटक के बीच सभी की नजरें ममता बनर्जी की अगली राजनीतिक रणनीति और भाजपा के अगले कदम पर टिक गई हैं।




