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भीषण गर्मी से झुलस रहा उत्तर और मध्य भारत! मानसून अब तक केरल नहीं पहुंचा, कई राज्यों में 47°C पार

राष्ट्रीय | अवधेश झा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026

देश का बड़ा हिस्सा इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। उत्तर और मध्य भारत में तापमान लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तक केरल तट तक नहीं पहुंच पाया है। मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि देश के अधिकांश हिस्सों में पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। लगातार बढ़ती गर्मी ने लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक तथा डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

India Meteorological Department यानी IMD के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बांदा में मंगलवार को इस सीजन का सबसे अधिक तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें लगभग सुनसान दिखाई दीं। लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। कई राज्यों में लगातार एयर कंडीशनर और कूलर चलने से बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव देखा जा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तक केरल नहीं पहुंचा है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यही भारत में मानसून का प्रवेश द्वार माना जाता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और हिंद महासागर में बन रही मौसमीय परिस्थितियों के कारण मानसून की प्रगति धीमी हुई है। यदि मानसून में और देरी होती है तो इसका असर खेती, जल संकट और बिजली खपत पर और अधिक गंभीर हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गर्मी केवल मौसमी बदलाव नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का संकेत भी है। लगातार बढ़ती “हॉट नाइट्स”, लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव और बारिश के पैटर्न में बदलाव ने मौसम को पहले से अधिक खतरनाक बना दिया है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों, दिहाड़ी मजदूरों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिमभरी मानी जा रही है।

राजस्थान, विदर्भ और बुंदेलखंड क्षेत्र में हालात सबसे अधिक गंभीर बताए जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसान, निर्माण मजदूर और सड़क किनारे काम करने वाले लोग लू के सीधे खतरे का सामना कर रहे हैं। कई शहरों में प्रशासन ने दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। स्कूलों के समय में बदलाव और अस्पतालों में विशेष हीट स्ट्रोक वार्ड बनाने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।

इस बीच मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में गर्मी से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। हालांकि पूर्वोत्तर भारत, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों, पश्चिमी तट और तमिलनाडु के अंदरूनी इलाकों में अपेक्षाकृत कम तापमान दर्ज किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून जल्द सक्रिय नहीं होता तो आने वाले हफ्तों में जल संकट, बिजली संकट और कृषि क्षेत्र पर दबाव और बढ़ सकता है। देश पहले ही ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी और बिजली मांग के रिकॉर्ड स्तर का सामना कर रहा है। ऐसे में भीषण गर्मी अब केवल मौसम की खबर नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और आम जनजीवन की बड़ी चुनौती बन चुकी है।

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