बिजनेस | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026
देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों को आने वाले दिनों में बड़ा झटका लग सकता है। Air India, उसकी लो-कॉस्ट सहायक कंपनी Air India Express और IndiGo ने जून से घरेलू रूट्स पर प्रतिदिन 250 से अधिक उड़ानें कम करने का फैसला किया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच एयरलाइंस लागत कम करने और घटती मांग से निपटने की कोशिश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में यह कटौती हवाई किरायों को और अधिक महंगा बना सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कई प्रमुख घरेलू रूट्स पर टिकट पहले ही सामान्य से लगभग दोगुने दाम पर बिक रहे हैं। अब जब उड़ानों की संख्या कम होगी तो सीटों की उपलब्धता घटेगी और एयरलाइंस को किराए बढ़ाने का और ज्यादा मौका मिलेगा। इसका सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ सकता है जो आखिरी समय में टिकट बुक करते हैं या नियमित रूप से बिजनेस और पारिवारिक यात्राएं करते हैं।
एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि जून के मध्य के बाद यात्रा की मांग पारंपरिक रूप से कमजोर हो जाती है क्योंकि गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने लगती हैं। इस बार स्थिति और कठिन इसलिए हो गई है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट और तेल कीमतों में उछाल के कारण ATF की लागत तेजी से बढ़ रही है। विमानन उद्योग में ईंधन लागत कुल परिचालन खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाती है और इसकी कीमतों में हर बढ़ोतरी का सीधा असर टिकट किरायों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार एयरलाइंस इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही हैं। एक ओर ईंधन महंगा हो रहा है, दूसरी ओर यात्रियों की संख्या में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही। कई कंपनियां “कम मांग और ज्यादा लागत” की स्थिति में उड़ानों को लाभदायक बनाए रखने के लिए क्षमता घटाने की रणनीति अपना रही हैं। यही कारण है कि घरेलू एविएशन सेक्टर में अब “कंट्रोल्ड कैपेसिटी” मॉडल तेजी से दिखाई देने लगा है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पर्यटन, होटल उद्योग और व्यापारिक यात्राओं पर भी पड़ सकता है। गर्मियों के बाद आमतौर पर एयरलाइंस किराए कम कर यात्रियों को आकर्षित करने की कोशिश करती थीं, लेकिन इस बार हालात उलटे दिखाई दे रहे हैं। यदि तेल कीमतों में और तेजी आती है तो आने वाले महीनों में घरेलू उड़ान किरायों में और बढ़ोतरी संभव है।
विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता ने वैश्विक विमानन उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी बड़ी ईंधन जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में किसी भी उथल-पुथल का असर सीधे भारतीय एयरलाइंस पर पड़ता है।
फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि आने वाले समय में हवाई यात्रा पहले से अधिक महंगी और सीमित हो सकती है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो घरेलू एविएशन सेक्टर में किरायों और उड़ानों दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।




