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QUAD के भविष्य पर सवाल! अगला शिखर सम्मेलन कब होगा, नहीं दे पाया कोई जवाब

अंतरराष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 मई 2026

भारत की मेजबानी में हुई QUAD देशों के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक कई बड़े रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा के बावजूद एक महत्वपूर्ण सवाल का जवाब दिए बिना खत्म हो गई — आखिर अगला QUAD लीडर्स समिट कब और कहां होगा? इसी अस्पष्टता ने अब QUAD समूह के भविष्य और उसकी राजनीतिक दिशा को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या QUAD अब फिर से केवल विदेश मंत्रियों के स्तर तक सीमित हो जाएगा, जैसा कि 2021 से पहले हुआ करता था।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong, जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi और अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शामिल हुए। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में केवल इतना कहा गया कि सभी नेता “अगले शिखर सम्मेलन का इंतजार कर रहे हैं”, लेकिन यह नहीं बताया गया कि वह सम्मेलन कब होगा और उसकी मेजबानी कौन करेगा। यही बात अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।

पिछले वर्षों में QUAD बैठकों के बाद जारी संयुक्त बयानों में अगली मेजबानी करने वाले देश का नाम स्पष्ट रूप से घोषित किया जाता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। माना जा रहा था कि अगला QUAD Leaders Summit भारत में आयोजित होगा, लेकिन नेताओं के व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रम और वैश्विक तनावों के कारण अब तक कोई तारीख तय नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi, जापान की वरिष्ठ नेता Sanae Takaichi और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese के कार्यक्रमों को समन्वित करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी केवल कैलेंडर की समस्या नहीं बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी संकेत है। एक ओर चीन का बढ़ता प्रभाव, दक्षिण चीन सागर में तनाव और ताइवान को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में होर्मुज संकट और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे भी QUAD देशों की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में QUAD का फोकस रणनीतिक सैन्य गठजोड़ से हटकर समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों पर अधिक दिखाई दे रहा है।

बैठक के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक विकास का इंजन बताते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि QUAD केवल सुरक्षा मंच नहीं बल्कि आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। विदेश मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा सहयोग और तकनीकी साझेदारी को लेकर कई नई पहलों की घोषणा भी की। लेकिन इसके बावजूद नेताओं के शिखर सम्मेलन पर चुप्पी ने यह संकेत दिया कि QUAD के भीतर भी भविष्य की दिशा को लेकर नई रणनीतिक सोच चल रही है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द QUAD Leaders Summit की घोषणा नहीं होती तो यह समूह की राजनीतिक ताकत और वैश्विक प्रभाव को लेकर सवाल खड़े कर सकता है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह बैठक किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के इतर “साइडलाइन मीटिंग” के रूप में भी आयोजित हो सकती है, ताकि चारों देशों के शीर्ष नेताओं को एक साथ लाने की चुनौती कम हो सके।

फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि QUAD अपने मौजूदा स्वरूप को बरकरार रख पाएगा या फिर वह एक बार फिर केवल विदेश मंत्रियों तक सीमित रणनीतिक मंच बनकर रह जाएगा। Indo-Pacific क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच QUAD का भविष्य आने वाले समय की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक कहानियों में से एक बनता जा रहा है।

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