अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | क्वेटा/इस्लामाबाद | 26 मई 2026
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर बड़े आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया है। क्वेटा में सैनिकों को ले जा रही ट्रेन पर हुए भीषण कार बम धमाके में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि ट्रेन के डिब्बे पलट गए, कई गाड़ियां जलकर राख हो गईं और आसपास की इमारतें तक हिल गईं। आसमान में उठता काला धुआं और चीख-पुकार ने पूरे इलाके को दहला दिया।
इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने ली है। यह वही अलगाववादी संगठन है जो पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान सरकार, सेना और चीन समर्थित परियोजनाओं के खिलाफ हिंसक अभियान चला रहा है। लेकिन अब सवाल सिर्फ एक हमले का नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बलूचिस्तान में हिंसा अचानक इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?
दरअसल, यह हमला ऐसे समय हुआ जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन दौरे पर हैं और बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर रहे हैं। चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है, खासकर China-Pakistan Economic Corridor यानी CPEC को लेकर। यही परियोजना BLA के निशाने पर है। संगठन का आरोप है कि चीन और पाकिस्तान मिलकर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहे हैं जबकि स्थानीय लोगों को उसका फायदा नहीं मिल रहा।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे गरीब प्रांत माना जाता है। यहां गैस, सोना, तांबा, कोयला और दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार है। दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड और कॉपर प्रोजेक्ट्स में शामिल Reko Diq भी यहीं मौजूद है। इतना ही नहीं, Gwadar Port को चीन अपनी Belt and Road Initiative का अहम हिस्सा मानता है। लेकिन स्थानीय बलोच समुदाय का आरोप है कि उनकी जमीन, संसाधन और पहचान छीनी जा रही है जबकि उन्हें विकास से बाहर रखा गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यही असंतोष अब हथियारबंद विद्रोह में बदलता जा रहा है। 2025 में बलूचिस्तान में 250 से ज्यादा आतंकी हमले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में करीब 26 प्रतिशत ज्यादा हैं। सड़कों पर हमला, सेना पर घात लगाकर वार, पुलिस चौकियों पर बम धमाके और अब ट्रेन ब्लास्ट — यह सब दिखाता है कि BLA की ताकत और रणनीति दोनों बदल रही हैं।
BLA अब सिर्फ पहाड़ों में छिपा छोटा संगठन नहीं माना जाता। इसके पास प्रशिक्षित लड़ाके, आधुनिक हथियार और “मजीद ब्रिगेड” जैसी आत्मघाती इकाइयां हैं। संगठन ने महिलाओं तक को आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल किया है। चीन के इंजीनियरों, कांसुलेट और प्रोजेक्ट्स पर पहले भी हमले हो चुके हैं। अब यह लड़ाई सिर्फ पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि चीन की मौजूदगी के खिलाफ भी दिखाई देने लगी है।
स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि बलूचिस्तान सिर्फ पाकिस्तान का आंतरिक मुद्दा नहीं रह गया है। यह इलाका ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से जुड़ा है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी ताकतें इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका भी यहां मौजूद rare earth minerals यानी दुर्लभ खनिजों में दिलचस्पी दिखा चुका है क्योंकि इनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, मोबाइल, बैटरी और सैन्य तकनीक में होता है।
पाकिस्तान लगातार भारत और अफगानिस्तान पर बलूच विद्रोहियों को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है, हालांकि दोनों देश इन आरोपों से इनकार करते हैं। दूसरी तरफ बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों पर अत्याचार, गायब किए गए लोगों और दमन के आरोप लगाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बलूचिस्तान में हिंसा इसी तरह बढ़ती रही तो इसका असर सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा। चीन के अरबों डॉलर के निवेश, क्षेत्रीय स्थिरता और दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के भीतर बढ़ती अस्थिरता दुनिया के लिए एक बड़ा रणनीतिक खतरा बन सकती है।




