अंतरराष्ट्रीय / चीन / भू-राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 21 मई 2026
एक तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बीजिंग में दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियों — अमेरिका और रूस — के नेताओं का भव्य स्वागत कर वैश्विक शक्ति संतुलन का नया संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन के कई प्रांत भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। हुनान, हुबेई और गुइझोउ समेत कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ ने तबाही मचा दी है। सरकारी मीडिया के मुताबिक अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और कई इलाकों में संचार व्यवस्था, सड़कें और घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
हुनान प्रांत के शिमेन काउंटी में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। यहां पांच लोगों की मौत और 11 लोगों के लापता होने की पुष्टि हुई है। लगभग 19 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। वहीं हुबेई प्रांत में सड़कें नदियों में बदल गईं, जहां लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू टीमों को inflatable boats का इस्तेमाल करना पड़ा। गुइझोउ प्रांत में भी चार लोगों की मौत और पांच लोगों के लापता होने की खबर है। हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचाए गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह प्राकृतिक संकट ऐसे समय आया है जब बीजिंग दुनिया को अपनी “स्थिर और शक्तिशाली” वैश्विक छवि दिखाने में जुटा हुआ है। पिछले एक सप्ताह में शी जिनपिंग ने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का लगभग समान भव्य स्वागत किया। BBC की एक विशेष रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि क्या ट्रंप और पुतिन को चीन में “एक जैसा सम्मान” देकर बीजिंग यह संदेश देना चाहता है कि अब वह केवल एशियाई शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का निर्णायक केंद्र बन चुका है?
बीजिंग में दोनों नेताओं के स्वागत में राष्ट्रीय ध्वज, सैन्य बैंड, बच्चों की कतारें और हाई-प्रोफाइल कूटनीतिक आयोजन दिखाई दिए। लेकिन इन चमकदार तस्वीरों के पीछे चीन कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों का सामना भी कर रहा है। एक ओर अमेरिकी दबाव, व्यापार युद्ध और इंडो-पैसिफिक तनाव हैं, दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती, रियल एस्टेट संकट और अब जलवायु आपदाओं का बढ़ता खतरा भी सामने है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब अपनी वैश्विक रणनीति को “सुपरपावर इमेज” और “संकट प्रबंधन” दोनों के मिश्रण के रूप में आगे बढ़ा रहा है। शी जिनपिंग की कोशिश है कि चीन खुद को अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाने वाली, स्थिरता देने वाली और वैश्विक शासन व्यवस्था को प्रभावित करने वाली शक्ति के रूप में पेश करे। लेकिन बाढ़ जैसी आपदाएं यह भी याद दिलाती हैं कि जलवायु परिवर्तन और आंतरिक असमानताएं दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी असुरक्षित बना सकती हैं।
पिछले कुछ वर्षों में चीन में बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़ रहे हैं। चीन की विशाल औद्योगिक अर्थव्यवस्था और तेजी से शहरीकरण ने पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ाया है। यही कारण है कि बीजिंग अब “ग्रीन टेक्नोलॉजी”, क्लाइमेट इंफ्रास्ट्रक्चर और आपदा प्रबंधन को राष्ट्रीय सुरक्षा के हिस्से के रूप में देखने लगा है।
फिलहाल दुनिया की नजर दो तस्वीरों पर टिकी है — एक तस्वीर बीजिंग के भव्य राजनयिक मंच की, जहां शी जिनपिंग ट्रंप और पुतिन के साथ वैश्विक शक्ति संतुलन की नई कहानी लिखने की कोशिश कर रहे हैं; और दूसरी तस्वीर चीन के बाढ़ प्रभावित इलाकों की, जहां हजारों लोग प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। यही आज के चीन की सबसे बड़ी वास्तविकता है — एक उभरती महाशक्ति, जो दुनिया को प्रभावित करना चाहती है, लेकिन अपने भीतर भी कई बड़े संकटों से घिरी हुई है।




