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ट्रंप बोले- “डील करो, वरना होगा बड़ा हमला”: ईरान-अमेरिका तनाव से दुनिया पर मंडरा रहा ऊर्जा और खाद्य संकट

अंतरराष्ट्रीय / पश्चिम एशिया / वैश्विक अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन / तेहरान / होर्मुज | 21 मई 2026

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को साफ चेतावनी दी कि ईरान के साथ बातचीत “अंतिम चरण” में है और यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका “कुछ बेहद कठोर कदम” उठा सकता है। ट्रंप ने कहा कि वह युद्ध खत्म करने की जल्दी में नहीं हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर बड़ा सैन्य हमला किया जा सकता है। दूसरी ओर तेहरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान पर दोबारा हमला हुआ, तो “क्षेत्रीय युद्ध अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।”

दरअसल, अप्रैल 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए “Operation Epic Fury” के बाद घोषित युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। पिछले छह सप्ताह से पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई निर्णायक समझौता सामने नहीं आया। ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान “डील के लिए मजबूर” है, जबकि ईरान अमेरिकी धमकियों को “नई जंग की तैयारी” बता रहा है।

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने खुले शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान की जवाबी कार्रवाई “पूरे क्षेत्र से आगे” जाएगी। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका पर “नई जंग की साजिश” का आरोप लगाया। ईरान का कहना है कि उसने अभी तक अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल भी नहीं किया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक और हवाई सैन्य मौजूदगी पहले से ज्यादा बढ़ा दी है।

इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्ग — होर्मुज जलडमरूमध्य — का मुद्दा अब वार्ता का केंद्रीय बिंदु बन चुका है। यह वही मार्ग है जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG की सप्लाई गुजरती है। युद्धविराम के बावजूद यह मार्ग पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। सैकड़ों तेल टैंकर अब भी खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने बुधवार को पुष्टि की कि उनका तेल टैंकर “Universal Winner” फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा है। जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह टैंकर कुवैत से तेल लेकर दक्षिण कोरिया जा रहा है। लेकिन इस पूरे मार्ग पर अब भी सैन्य तनाव और हमलों का खतरा बना हुआ है। हाल के हफ्तों में कई जहाजों पर हमले और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

ऊर्जा संकट का असर अब सीधे आम जनता तक पहुंचने लगा है। तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं और कई देशों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है। अफ्रीकी देशों, खासकर केन्या में ईंधन महंगा होने के कारण बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था तक प्रभावित हो गई है। इसके अलावा खाद संकट का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया के लगभग एक-तिहाई उर्वरक (fertilizer) की सप्लाई भी इसी समुद्री मार्ग से होती है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज संकट लंबा खिंचा तो दुनिया “गंभीर खाद्य मूल्य संकट” और “वैश्विक कृषि झटके” का सामना कर सकती है।

अमेरिका के भीतर भी ट्रंप पर भारी राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। नवंबर 2026 के कांग्रेस चुनाव नजदीक हैं और बढ़ती पेट्रोल कीमतों ने अमेरिकी जनता में नाराजगी बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप की लोकप्रियता पर भी इसका असर पड़ा है। यही वजह है कि व्हाइट हाउस अब किसी तरह ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा पूरी तरह खुल सके और वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो जाए।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या यह संकट वास्तव में कूटनीति से खत्म होगा या दुनिया एक और बड़े युद्ध के करीब पहुंच रही है? फिलहाल ट्रंप “डील या हमला” की भाषा बोल रहे हैं, जबकि ईरान “जवाबी विनाश” की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया का यह टकराव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य आपूर्ति के भविष्य से जुड़ा संकट बन चुका है।

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