अंतरराष्ट्रीय / पश्चिम एशिया / कूटनीति | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान / इस्लामाबाद / वॉशिंगटन | 21 मई 2026
ईरान युद्ध को लेकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान अब खुलकर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में दिखाई दे रहा है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी बुधवार को तेहरान पहुंचे, जहां वह ईरानी अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत करेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बावजूद तनाव लगातार बढ़ रहा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे को खुली धमकियां दे रहे हैं। पाकिस्तान की यह सक्रिय कूटनीतिक भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बैक-चैनल वार्ताओं में इस्लामाबाद अब प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान पिछले कई दिनों से दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और संभावित समझौते की जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले सऊदी अरब भी पाकिस्तान की मध्यस्थता की खुलकर सराहना कर चुका है।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका और इजरायल को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि यदि अमेरिका और इजरायल ने दोबारा हमला किया, तो “मध्य पूर्व का युद्ध क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकल जाएगा।” IRGC ने कहा कि ईरान ने अभी तक “इस्लामिक रिवोल्यूशन की पूरी सैन्य शक्ति” का इस्तेमाल नहीं किया है और अगला चरण दुनिया के लिए कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि अगले कुछ दिनों में स्थायी समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि “शुक्रवार, शनिवार या अगले सप्ताह की शुरुआत तक” स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह “डील” को आखिरी मौका देना चाहते हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि युद्ध फिर शुरू हुआ, तो दुनिया कई और बड़े सरप्राइज देखेगी।” ईरान का दावा है कि फरवरी से शुरू हुए युद्ध में अमेरिका और इजरायल अपनी पूरी सैन्य क्षमता इस्तेमाल करने के बावजूद निर्णायक सफलता हासिल नहीं कर सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया को फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट बना हुआ है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और LNG सप्लाई का रास्ता इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऊर्जा बाजार, शिपिंग और वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस संकट को अपने लिए एक बड़े कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है। एक तरफ वह अमेरिका के साथ संवाद बनाए हुए है, दूसरी ओर ईरान और खाड़ी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। यदि इस्लामाबाद इस मध्यस्थता में सफलता हासिल करता है, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका और रणनीतिक महत्व दोनों बढ़ सकते हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए स्थायी समझौते तक पहुंच पाएंगे, या फिर पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव और वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ेगा।




