Home » National » दुनिया की टॉप 100 कंपनियों से बाहर हुआ भारत, क्या डगमगा रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा?

दुनिया की टॉप 100 कंपनियों से बाहर हुआ भारत, क्या डगमगा रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा?

राष्ट्रीय / अर्थव्यवस्था / बाजार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 मई 2026

दुनिया की शीर्ष 100 कंपनियों की सूची से भारत की सभी कंपनियों का बाहर हो जाना भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियां भी अब वैश्विक टॉप-100 मार्केट कैप सूची से बाहर हो चुकी हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से भरोसा उठता जा रहा है और बड़े निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार यह स्थिति केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर रोजगार, उद्योग और आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि यदि यही हालात जारी रहे तो बेरोजगारी और गंभीर रूप ले सकती है। कंपनियों का मुनाफा घटेगा, नए निवेश कम होंगे और नौकरियों के अवसर तेजी से घट सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अर्थव्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों से ध्यान हटाकर केवल प्रचार और इवेंट आधारित राजनीति में व्यस्त है। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि “देश टॉफी बांटने से नहीं, मजबूत आर्थिक और विदेश नीति से चलता है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया संकट, तेल कीमतों में उछाल और विदेशी फंडों की निकासी का असर भारतीय बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है। खासतौर पर ऊर्जा आयात पर भारत की भारी निर्भरता ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

हालांकि सरकार समर्थक अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि वैश्विक मंदी और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर केवल भारत पर नहीं बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। उनका कहना है कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और लंबी अवधि में भारतीय बाजार मजबूत स्थिति में लौट सकते हैं।

इसके बावजूद यह सवाल अब गंभीरता से उठने लगा है कि क्या भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार बनकर रह जाएगा या फिर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ पाएगा। दुनिया की टॉप कंपनियों की सूची से भारतीय कंपनियों का बाहर होना केवल एक बाजार संकेत नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक रणनीति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह माना जा रहा है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted