टेक / साइबर सुरक्षा / बैंकिंग/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | गुरुग्राम / चंडीगढ़ | 20 मई 2026
देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे ऑनलाइन ठगी के मामलों के बीच अब बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। हरियाणा पुलिस और HDFC बैंक ने मिलकर “डबल OTP सिस्टम” शुरू किया है, जिसके तहत अब ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए केवल एक नहीं बल्कि दो OTP की जरूरत होगी। यह नई व्यवस्था खासतौर पर 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के बैंक खातों को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है।
हरियाणा पुलिस की आईपीएस अधिकारी उपासना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह सिस्टम फिलहाल गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकुला की लगभग 50 HDFC बैंक शाखाओं में स्वैच्छिक आधार पर शुरू किया गया है। यदि यह प्रयोग सफल साबित होता है, तो आने वाले समय में इसे देशभर में लागू किया जा सकता है। इस पहल को साइबर अपराध के खिलाफ “मानवीय सुरक्षा कवच” के रूप में देखा जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत जब भी कोई वरिष्ठ नागरिक अपने बैंक खाते से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश करेगा, तो बैंक की ओर से दो अलग-अलग OTP भेजे जाएंगे। पहला OTP हमेशा की तरह खाताधारक के मोबाइल नंबर पर आएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल पर भेजा जाएगा जिसे बुजुर्ग खाताधारक ने अपने भरोसेमंद सदस्य या परिवार के सदस्य के रूप में नामित किया होगा। दोनों OTP दर्ज किए बिना ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सकेगा। यानी अगर साइबर ठग किसी तरह बुजुर्ग से पहला OTP हासिल भी कर लें, तब भी दूसरे OTP के बिना बैंक खाते से पैसा निकाल पाना लगभग असंभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था तकनीकी हैकिंग से ज्यादा “मनोवैज्ञानिक ठगी” को रोकने में मदद करेगी। हाल के वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस कॉल, KYC अपडेट और सरकारी एजेंसी बनकर डराने जैसे मामलों में बुजुर्ग सबसे आसान निशाना बने हैं। कई बार डर, घबराहट और कम डिजिटल जागरूकता के कारण वरिष्ठ नागरिक अपना OTP ठगों के साथ साझा कर देते हैं। लेकिन डबल OTP सिस्टम में परिवार का दूसरा सदस्य एक “ह्यूमन फायरवॉल” की तरह काम करेगा और ट्रांजैक्शन को रोक सकेगा।
साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार यह मॉडल केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा मॉडल भी है। इससे बुजुर्ग अकेले फैसले लेने के दबाव से बचेंगे और उन्हें सोचने-समझने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। यही समय कई बार करोड़ों रुपये की ठगी रोक सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल की पहल पर HDFC बैंक ने 14 अप्रैल 2026 से इस परियोजना पर काम शुरू किया था। साइबर अपराध के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस और बैंकिंग सेक्टर अब केवल जागरूकता अभियान तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सुरक्षा की नई तकनीकी परतें जोड़ने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।
देश में पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़े हैं, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं। सरकार और बैंकिंग संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब यही है कि डिजिटल सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। ऐसे में डबल OTP सिस्टम को वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़े सुरक्षा प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में इसे केवल बुजुर्गों तक सीमित न रखकर बड़े लेन-देन, बिजनेस अकाउंट्स और हाई-रिस्क बैंकिंग ट्रांजैक्शन में भी लागू किया जा सकता है। साइबर अपराध के इस दौर में बैंकिंग सुरक्षा की यह नई पहल आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।




