राष्ट्रीय / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | अमेठी / रायबरेली | 20 मई 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के अमेठी और रायबरेली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और RSS पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने खुले मंच से कहा कि वह अपने बयान पर कभी माफी नहीं मांगेंगे और एक बार फिर दोहराया कि “नरेंद्र मोदी और अमित शाह गद्दार हैं, क्योंकि उन्होंने संविधान पर हमला किया है।” राहुल गांधी ने RSS को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “सुन लो अच्छी तरह… मैं तुम लोगों से नहीं डरता।” उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और कांग्रेस-बीजेपी के बीच टकराव को और अधिक तीखा बना दिया है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में केवल राजनीतिक आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि देश के सामने “आर्थिक तूफान” आने की चेतावनी भी दी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में देश गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई, खाद की कमी और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का सामना कर सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि इस संकट का सबसे बड़ा असर किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, जबकि बड़े उद्योगपति और सत्ता से जुड़े लोग सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हाथों में सौंप दी गई है और आम जनता को उसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने नोटबंदी और कोविड काल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जैसे नोटबंदी और कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनता के सामने भावुक होकर आए थे, वैसे ही आने वाले समय में भी वह टीवी पर आकर हाथ जोड़ते दिखाई देंगे। राहुल गांधी ने कहा, “देख लेना… एक महीने के अंदर नरेंद्र मोदी टीवी पर हाथ जोड़कर कहेंगे कि मेरी गलती नहीं है।” उनके इस बयान को कांग्रेस समर्थक आर्थिक और राजनीतिक चेतावनी के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे भय और भ्रम फैलाने की राजनीति बता रही है।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी का कहना है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए “गद्दार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है। पार्टी नेताओं ने राहुल गांधी पर देश की संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने और राजनीतिक निराशा में “अराजक भाषा” अपनाने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं पर कथित हमलों के खिलाफ अपनी राजनीतिक लड़ाई को और आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी अब अपने राजनीतिक नैरेटिव को केवल चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, आर्थिक असमानता और संस्थागत नियंत्रण जैसे बड़े सवालों को जनता के बीच केंद्र में लाने की कोशिश कर रहे हैं। रायबरेली और अमेठी से दिए गए उनके बयान इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं, जहां कांग्रेस बीजेपी और RSS के खिलाफ वैचारिक टकराव को और तेज करने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
राहुल गांधी के इन बयानों के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी और वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस इस आक्रामक राजनीतिक लाइन को आगे भी जारी रखेगी और बीजेपी इसका जवाब किस तरह देती है।




