अंतरराष्ट्रीय / रक्षा / पश्चिम एशिया | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान / वॉशिंगटन | 20 मई 2026
ईरान और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य संघर्ष को लेकर अब एक बेहद बड़ा और विस्फोटक दावा सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरानी सेनाओं ने युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया था और ऐसा करने वाला ईरान दुनिया का पहला देश बन गया है। अराघची ने यह दावा अमेरिकी संसद की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए किया, जिसमें ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों को हुए भारी नुकसान का जिक्र किया गया है। इस बयान ने पश्चिम एशिया में पहले से बढ़े तनाव को और अधिक गंभीर बना दिया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि संघर्ष शुरू होने के कई महीने बाद अमेरिकी कांग्रेस अब यह स्वीकार कर रही है कि अरबों डॉलर की कीमत वाले अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हुए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने कहा कि यह उन दावों की पुष्टि है जिन्हें ईरान लगातार करता रहा है। अराघची ने दावा किया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं पहली ऐसी सैन्य शक्ति हैं जिसने “बहुचर्चित F-35” को मार गिराया। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो दुनिया और भी “चौंकाने वाले दृश्य” देखेगी।
दरअसल, 13 मई 2026 को प्रकाशित अमेरिकी संसद की कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के करीब 42 सैन्य विमान या तो नष्ट हुए या उन्हें नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह आंकड़ा आगे बढ़ सकता है क्योंकि कई सूचनाएं अब भी गोपनीय हैं और नुकसान की पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार इन विमानों में स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट और स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट भी शामिल थे। हालांकि रिपोर्ट में सीधे तौर पर F-35 के गिराए जाने की पुष्टि नहीं की गई, लेकिन ईरान ने उसी रिपोर्ट को अपने दावे के समर्थन के रूप में पेश किया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिकी सेना को यह नुकसान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान हुआ। यह 40 दिन का अमेरिकी-इजरायली हवाई अभियान था, जो 28 फरवरी 2026 से ईरान के खिलाफ चलाया गया। इसी दौरान पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर हवाई हमले, ड्रोन ऑपरेशन और समुद्री तनाव देखने को मिले थे। अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक कुल सैन्य नुकसान का कोई आधिकारिक विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन कांग्रेस के समक्ष प्रस्तुत लागत अनुमान में यह जरूर स्वीकार किया गया कि ईरान अभियान अमेरिका के लिए बेहद महंगा साबित हुआ।
विशेषज्ञों के मुताबिक यदि किसी संघर्ष में वास्तव में F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट को मार गिराया गया है, तो यह आधुनिक युद्ध इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य घटनाओं में गिना जाएगा। F-35 को दुनिया का सबसे उन्नत और लगभग “अदृश्य” लड़ाकू विमान माना जाता है। इसकी तकनीक अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में ईरान का दावा केवल सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता को सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक रक्षा बाजार और भू-राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका लंबे समय से F-35 को अपने सहयोगी देशों के बीच “अजेय रक्षा तकनीक” के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। यदि उसकी क्षमताओं पर सवाल उठते हैं, तो उसका असर केवल अमेरिकी प्रतिष्ठा पर नहीं, बल्कि वैश्विक हथियार बाजार और रक्षा गठबंधनों पर भी पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया पहले ही ऊर्जा संकट, समुद्री तनाव और नए सैन्य समीकरणों के दौर से गुजर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा टकराव की आशंका पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। ईरान का यह बयान केवल अतीत के युद्ध का दावा नहीं, बल्कि भविष्य के संघर्ष के लिए खुली चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका ईरान के इस दावे का औपचारिक जवाब देगा, या फिर यह मामला “सूचना युद्ध” और रणनीतिक मनोवैज्ञानिक दबाव का हिस्सा बनकर रह जाएगा। लेकिन इतना तय है कि पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन और सैन्य तकनीक को लेकर बहस अब पहले से कहीं ज्यादा तीखी हो चुकी है।




