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दिल्ली की सड़कों पर ट्रंप के पोस्टर, ऑटो चालकों को चाय के पैकेट का ऑफर; अमेरिकी ‘सॉफ्ट पावर’ अभियान पर छिड़ी बहस

अंतरराष्ट्रीय / भारत-अमेरिका / राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 मई 2026

दिल्ली की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही दृश्य दिखाई दे रहा है। राजधानी के कई ऑटो-रिक्शाओं पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बड़ी तस्वीरें, अमेरिकी झंडा और “Happy Birthday America” जैसे संदेश नजर आ रहे हैं। आमतौर पर जहां ऑटो पर स्थानीय विज्ञापन, कोचिंग सेंटर, क्लीनिक या राजनीतिक पोस्टर दिखाई देते हैं, वहीं अब अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़ा यह प्रचार अभियान लोगों का ध्यान खींच रहा है। लेकिन इस पूरे अभियान को लेकर अब केवल जिज्ञासा ही नहीं, बल्कि भारत में विदेशी “सॉफ्ट पावर” और सार्वजनिक प्रचार की राजनीति पर भी नई बहस शुरू हो गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अभियान भारत स्थित अमेरिकी दूतावास की ओर से शुरू किया गया है। करीब 100 से अधिक ऑटो-रिक्शाओं पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी वाले पोस्टर लगाए गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका अपनी स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दुनिया के कई देशों में सांस्कृतिक और जनसंपर्क कार्यक्रम चला रहा है और भारत में यह अभियान उसी रणनीति का हिस्सा है। सोशल मीडिया पर अमेरिकी दूतावास ने पहले ही संकेत दिया था कि “आजादी अब सड़कों पर उतर आई है”, और अब उसका वास्तविक रूप दिल्ली की सड़कों पर दिखाई दे रहा है।

हालांकि इस अभियान का सबसे दिलचस्प और विवादित पहलू वह तरीका बन गया, जिसके जरिए ऑटो चालकों को इसमें शामिल किया गया। कई ड्राइवरों ने दावा किया कि शुरुआत में उन्होंने पोस्टर लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उन्हें “एक पैकेट चाय” देने का प्रस्ताव दिया गया। कुछ ड्राइवरों ने यह भी कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि पोस्टर पर क्या लिखा है, बस इतना मालूम था कि तस्वीर “ट्रंप” की है। एक ड्राइवर ने बताया कि उसका ऑटो कवर फट गया था, इसलिए उसने नया कवर समझकर पोस्टर लगवा लिया। यह घटनाक्रम अब सोशल मीडिया पर वायरल है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या भारत की सड़कों पर विदेशी राजनीतिक प्रतीकों का इस तरह प्रचार सामान्य माना जाना चाहिए?

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विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सांस्कृतिक प्रचार नहीं, बल्कि “सॉफ्ट डिप्लोमेसी” और “इमेज पॉलिटिक्स” का आधुनिक उदाहरण है। दुनिया की बड़ी शक्तियां अब केवल सैन्य ताकत या व्यापार से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रभाव, डिजिटल नैरेटिव और जनसंपर्क अभियानों के जरिए भी अपनी मौजूदगी मजबूत करती हैं। अमेरिका लंबे समय से हॉलीवुड, टेक कंपनियों, सोशल मीडिया और वैश्विक ब्रांडिंग के माध्यम से अपनी “सॉफ्ट पावर” का इस्तेमाल करता रहा है। लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील देश में अमेरिकी राष्ट्रपति की तस्वीरों का सड़क स्तर पर प्रचार स्वाभाविक रूप से बहस को जन्म दे रहा है।

कुछ विशेषज्ञ इसे भारत-अमेरिका संबंधों में आई हालिया कड़वाहट को कम करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। पिछले वर्ष टैरिफ, व्यापार और भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में अमेरिकी दूतावास का यह अभियान “पब्लिक कनेक्ट” और सकारात्मक छवि निर्माण की रणनीति माना जा रहा है। वहीं आलोचकों का सवाल है कि यदि किसी अन्य देश ने भारत में इसी तरह अपने राष्ट्रपति या राजनीतिक नेतृत्व का सड़क स्तर पर प्रचार किया होता, तो क्या उसे भी सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम माना जाता?

सोशल मीडिया पर इस अभियान को लेकर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। कुछ लोग इसे अमेरिका की रचनात्मक कूटनीति बता रहे हैं, तो कुछ इसे भारत की सड़कों पर विदेशी राजनीतिक ब्रांडिंग का असहज उदाहरण मान रहे हैं। कई यूजर्स ने तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली के ऑटो अब “मोबाइल एम्बेसी” बनते जा रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आर्थिक रूप से कमजोर ऑटो चालकों को मामूली लालच देकर इस तरह के प्रचार अभियानों में शामिल करना नैतिक रूप से उचित है?

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दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा अभियान ऐसे समय सामने आया है जब वैश्विक राजनीति में “इमेज मैनेजमेंट” और “नैरेटिव वॉर” पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुके हैं। अब देशों की लड़ाई केवल सीमाओं या बाजारों में नहीं, बल्कि सड़कों, सोशल मीडिया और जनमानस की धारणाओं में भी लड़ी जा रही है। दिल्ली की सड़कों पर ट्रंप के पोस्टर शायद इसी बदलती वैश्विक राजनीति की एक नई झलक हैं।

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