राजनीति / उत्तर प्रदेश | शीतांशु रमन | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 19 मई 2026
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है और इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बड़ा संकेत दिया है। अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए अखिलेश यादव ने साफ कहा कि उनका विरोधी “बहुत ताकतवर” है, इसलिए वे अभी अपनी पूरी चुनावी रणनीति सार्वजनिक नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले चुनाव में विपक्षी एकता और जीत की संभावना को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएंगे। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत और राष्ट्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच उत्तर प्रदेश की लड़ाई को बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी एक बार फिर कांग्रेस के साथ गठबंधन करेगी? इस सवाल पर अखिलेश यादव ने सीधा “हां” या “ना” नहीं कहा, लेकिन उन्होंने गठबंधन की राजनीति को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने की संभावनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा।
अखिलेश यादव ने बातचीत के दौरान कहा कि विपक्ष को कमजोर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि उनके सामने बेहद मजबूत राजनीतिक मशीनरी खड़ी है। उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि संसाधनों, एजेंसियों और बड़े प्रचार तंत्र के साथ चुनाव लड़ती है। ऐसे में विपक्ष को रणनीतिक और संयमित तरीके से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में समय से पहले रणनीति खोल देना हमेशा नुकसानदेह साबित हो सकता है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ भविष्य में मंच साझा करने और संयुक्त चुनाव प्रचार के सवाल पर भी अखिलेश यादव ने बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने खुलकर कुछ नहीं कहा, लेकिन यह जरूर माना कि विपक्षी दलों के बीच संवाद जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा फिलहाल अपने संगठन को मजबूत करने और जातीय-सामाजिक समीकरणों को साधने में लगी है, जबकि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि 2027 में विपक्ष का चेहरा कौन होगा, तो अखिलेश यादव ने सीधे किसी एक नेता का नाम लेने से बचते हुए विपक्ष के कई प्रमुख चेहरों का जिक्र किया। इससे यह संकेत भी मिला कि विपक्ष अभी किसी एक चेहरे पर दांव लगाने के बजाय सामूहिक रणनीति की ओर बढ़ सकता है। हालांकि बीजेपी लगातार यह दावा करती रही है कि विपक्ष के पास न नेतृत्व स्पष्ट है और न साझा एजेंडा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और कांग्रेस का रिश्ता हमेशा उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह प्रयोग सफल नहीं हुआ। इसके बाद 2024 और 2025 के राजनीतिक घटनाक्रमों में दोनों दल कई मुद्दों पर साथ दिखाई दिए, खासकर बीजेपी विरोधी राजनीति में। अब 2027 का चुनाव नजदीक आते ही फिर से गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अखिलेश यादव फिलहाल अपने सभी विकल्प खुले रखना चाहते हैं। वे एक तरफ मुस्लिम-यादव समीकरण और पिछड़ा वर्ग की राजनीति को मजबूत करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी विरोधी व्यापक गठबंधन की संभावना को भी जीवित रखना चाहते हैं। कांग्रेस के साथ गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला काफी हद तक आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजनीति, सीट शेयरिंग और जमीनी समीकरणों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल अखिलेश यादव का यह बयान साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 केवल राज्य की सत्ता की लड़ाई नहीं होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा राजनीतिक मुकाबला बन सकता है।




