ऑटोमोबाइल विशेष | इंशा रहमान | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 मई 2026
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV की बढ़ती लोकप्रियता अब केवल शहरों की सड़कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा नीति और ऑटोमोबाइल उद्योग की दिशा बदलने वाली बड़ी क्रांति बनती जा रही है। भारतीय ऊर्जा गठबंधन (IESA) की हालिया रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत में EV बैटरियों की मांग विस्फोटक स्तर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में जहां देश में EV बैटरी की मांग लगभग 20 GWh थी, वहीं 2032 तक इसके 10 गुना बढ़कर 200 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। यह केवल बैटरी बिक्री का आंकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत तेजी से पेट्रोल-डीजल आधारित परिवहन से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के बजट पर भारी असर डाला है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन लोगों को कम खर्च वाला विकल्प दिखाई देने लगे हैं। EV का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कम रनिंग कॉस्ट है। जहां पेट्रोल कार चलाने में प्रति किलोमीटर 7 से 10 रुपये तक खर्च आ सकता है, वहीं इलेक्ट्रिक कार का खर्च कई मामलों में 2 से 3 रुपये प्रति किलोमीटर तक सीमित रह जाता है। यही वजह है कि शहरों में रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोग अब EV को आर्थिक रूप से ज्यादा उपयोगी विकल्प मानने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार बेचने वाला बाजार नहीं रहना चाहता, बल्कि वह पूरी EV सप्लाई चेन का वैश्विक केंद्र बनने की तैयारी कर रहा है। बैटरी निर्माण, लिथियम प्रोसेसिंग, सेल मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग नेटवर्क और बैटरी रिसाइक्लिंग अब भारत की नई औद्योगिक रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत सरकार EV बैटरी निर्माण को सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल कर चुकी है।
भारत का EV बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। Tata Motors, MG Motor, Mahindra, Ola Electric, Ather, BYD और कई अन्य कंपनियां इस क्षेत्र में बड़े निवेश कर रही हैं। दोपहिया और तीनपहिया इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल हो चुका है। अब चारपहिया वाहनों और इलेक्ट्रिक बसों पर भी तेजी से फोकस बढ़ रहा है। कई राज्य सरकारें EV खरीद पर टैक्स छूट, मुफ्त रजिस्ट्रेशन और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी दे रही हैं।
हालांकि सवाल यह भी है कि क्या EV वास्तव में पेट्रोल का मजबूत विकल्प बन पाएगी? इसका जवाब पूरी तरह व्यक्ति की जरूरत और उपयोग पर निर्भर करता है। शहरों में रोजाना सीमित दूरी तय करने वालों के लिए EV बेहद उपयोगी साबित हो रही है। ऑफिस आना-जाना, बच्चों को स्कूल छोड़ना, बाजार जाना या शहर के अंदर छोटी यात्राएं—इन सभी में EV कम खर्च और कम मेंटेनेंस का फायदा देती है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इंजन ऑयल, क्लच और कई जटिल मैकेनिकल पार्ट्स नहीं होते, जिससे सर्विसिंग खर्च भी कम होता है।
पर्यावरण के लिहाज से भी EV को भविष्य का विकल्प माना जा रहा है। इनसे टेल पाइप उत्सर्जन नहीं होता, जिससे शहरों में वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण दोनों कम हो सकते हैं। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में जहां प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुका है, वहां इलेक्ट्रिक वाहन को भविष्य की जरूरत माना जा रहा है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है। बड़े शहरों में चार्जिंग स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन छोटे शहरों और हाईवे नेटवर्क पर अभी भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। यही कारण है कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग अब भी पेट्रोल या डीजल वाहनों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। पेट्रोल कार में कुछ मिनट में टैंक फुल हो जाता है, जबकि इलेक्ट्रिक कार को चार्ज होने में काफी समय लग सकता है।
बैटरी की लागत भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इलेक्ट्रिक कार की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा बैटरी पर खर्च होता है। यही वजह है कि समान फीचर्स वाली EV अभी पेट्रोल कार से महंगी पड़ती है। हालांकि कंपनियां अब बैटरी पर 8 साल तक की वारंटी देने लगी हैं और नई तकनीक के आने से कीमतें धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।
बैटरी टेक्नोलॉजी में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। कंपनियां ऐसी बैटरियों पर काम कर रही हैं जो ज्यादा दूरी तय कर सकें, तेजी से चार्ज हों और ज्यादा सुरक्षित हों। Solid-state battery, sodium-ion battery और ultra-fast charging जैसी तकनीकों को भविष्य की गेम चेंजर टेक्नोलॉजी माना जा रहा है। भारत सरकार भी Advanced Chemistry Cell (ACC) और Production Linked Incentive (PLI) योजनाओं के जरिए घरेलू बैटरी निर्माण को बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में EV सेक्टर भारत में लाखों नई नौकरियां पैदा कर सकता है। बैटरी निर्माण, चार्जिंग स्टेशन, सॉफ्टवेयर, रिसाइक्लिंग और ऊर्जा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के बड़े अवसर बन सकते हैं। इसके साथ ही भारत वैश्विक EV सप्लाई चेन में चीन के विकल्प के रूप में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि EV क्रांति की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत अपनी बिजली उत्पादन प्रणाली को कितना स्वच्छ बना पाता है। अगर बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयले पर आधारित रहेगा तो EV के पर्यावरणीय फायदे सीमित हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार सोलर और विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर भी लगातार जोर दे रही है।
स्पष्ट है कि भारत अब केवल पेट्रोल-डीजल पर निर्भर देश नहीं रहना चाहता। इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण नीति की दिशा तय करने वाले हैं। फिलहाल EV हर व्यक्ति के लिए परफेक्ट विकल्प नहीं है, लेकिन इतना जरूर साफ है कि आने वाला समय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का है और भारत इस बदलाव के केंद्र में तेजी से उभर रहा है।



