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मुज़फ्फरपुर की शाही लीची फिर करेगी दिलों पर राज, 20–25 मई के बीच बाजार में दस्तक… इस बार रिकॉर्ड मिठास और शानदार पैदावार की उम्मीद

व्यापार / कृषि विशेष | समी अहमद | ABC NATIONAL NEWS | मुज़फ्फरपुर/समस्तीपुर | 16 मई 2026

बिहार की पहचान बन चुकी मुज़फ्फरपुर की मशहूर शाही लीची एक बार फिर बाजारों में अपनी मिठास बिखेरने के लिए तैयार है। देश-विदेश में प्रसिद्ध इस खास फल का इंतजार अब खत्म होने वाला है, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार 20 से 25 मई 2026 के बीच शाही लीची की बड़े पैमाने पर बाजार में आवक शुरू हो जाएगी। इस बार किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अनुकूल मौसम की वजह से लीची की गुणवत्ता, मिठास और उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर रहेगा।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक और प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी विभाग के पूर्व प्रधान अन्वेषक प्रोफेसर (डॉ.) एस.के. सिंह का कहना है कि इस वर्ष मौसम ने लीची उत्पादकों का भरपूर साथ दिया है। मार्च और अप्रैल के दौरान तापमान संतुलित रहा, पर्याप्त नमी और आर्द्रता बनी रही तथा फूल और फलन का विकास समय पर हुआ। यही वजह है कि इस बार लीची का आकार बड़ा, रंग अधिक आकर्षक और स्वाद ज्यादा मीठा होने की संभावना जताई जा रही है।

मुज़फ्फरपुर और वैशाली क्षेत्र की शाही लीची केवल बिहार की कृषि उपज नहीं, बल्कि राज्य की वैश्विक पहचान बन चुकी है। अपने अनोखे स्वाद, सुगंध और रसीले गूदे के कारण यह फल भारत के साथ-साथ खाड़ी देशों, यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया तक निर्यात किया जाता है। शाही लीची को पहले ही GI टैग यानी भौगोलिक संकेतक का दर्जा मिल चुका है, जिसने इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार 20 से 25 मई के बीच लीची अपने सबसे बेहतर स्वाद और प्राकृतिक मिठास के स्तर पर पहुंचती है। इसी समय फल का रंग हल्का गुलाबी-लाल दिखाई देता है और उसका गूदा सबसे अधिक रसीला होता है। यही कारण है कि बाजार में इस अवधि की लीची की मांग सबसे ज्यादा रहती है।

पिछले वर्ष 2025 में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों ने लीची उत्पादन को काफी प्रभावित किया था। असामान्य गर्मी, तापमान में तेज उतार-चढ़ाव और कम आर्द्रता के कारण फल का विकास प्रभावित हुआ था। कई जगहों पर गुठली का आकार बड़ा हो गया था और गूदे की मात्रा तथा मिठास में कमी देखी गई थी। लेकिन इस बार मौसम सामान्य रहने से किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है।

हालांकि इस बार भी किसानों के सामने कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों ने फल छेदक कीट यानी फ्रूट बोरर को लेकर चेतावनी दी है। यह कीट फल के अंदर प्रवेश कर उसे नुकसान पहुंचाता है, जिससे बाहर से स्वस्थ दिखने वाला फल अंदर से खराब हो सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समय पर कीटनाशकों के छिड़काव, बागों की नियमित निगरानी और जैविक नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अगर समय रहते नियंत्रण किया जाए तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

वैश्विक बाजार में भी बिहार की शाही लीची की मांग लगातार बढ़ रही है। मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों में भारतीय लीची की लोकप्रियता बढ़ी है। आधुनिक कोल्ड-चेन सिस्टम और एयर फ्रेट सुविधाओं के कारण अब ताजगी बनाए रखते हुए तेजी से निर्यात संभव हो पा रहा है। इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

शाही लीची स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है। इसमें विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। गर्मियों में यह शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला फल माना जाता है और त्वचा के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लीची की हर फसल के पीछे किसानों की महीनों की मेहनत छिपी होती है। मौसम की अनिश्चितता, तेज गर्मी और कीटों के खतरे के बावजूद किसान दिन-रात मेहनत कर इस फल को तैयार करते हैं। यही वजह है कि हर लीची के साथ किसानों की उम्मीदें और उनकी मेहनत जुड़ी होती है।

अब जैसे-जैसे मई का तीसरा सप्ताह करीब आ रहा है, बाजारों में शाही लीची की मिठास की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस बार उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता, ज्यादा मिठास और भरपूर रसीलेपन वाली लीची का स्वाद मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 की शाही लीची केवल एक मौसमी फल नहीं, बल्कि अनुकूल मौसम, वैज्ञानिक प्रबंधन और किसानों की मेहनत का बेहतरीन संगम है।

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