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सफेद साड़ी, हवाई चप्पल और बेबाक अंदाज… बंगाल में सायोनी घोष बनीं नई ‘दीदी’ की झलक

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राजनीति | साजिद अली | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता | 28 अप्रैल 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया चेहरा तेजी से उभरता नजर आ रहा है, जिसकी तुलना सीधे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस की युवा सांसद सायोनी घोष अपने पहनावे, बोलने के अंदाज और आक्रामक प्रचार शैली के कारण चर्चा के केंद्र में हैं। सफेद साड़ी और पैरों में साधारण हवाई चप्पल—यह वही पहचान है जिसने कभी ममता बनर्जी को ‘जनता की नेता’ बनाया था, और अब उसी छवि में सायोनी घोष को देखा जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि सायोनी घोष केवल एक प्रचारक नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की नई पीढ़ी का चेहरा बन चुकी हैं। चुनावी सभाओं में उनका जोश, तेज आवाज और सीधा संवाद लोगों को आकर्षित कर रहा है। खास बात यह है कि उनके भाषणों में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि कविता, गीत और भावनात्मक अपील भी शामिल होती है, जो उन्हें भीड़ से अलग बनाती है। युवा से लेकर बुजुर्ग तक, हर वर्ग के बीच उनकी पकड़ लगातार मजबूत होती दिख रही है।

सायोनी घोष का सफर भी दिलचस्प रहा है। राजनीति में आने से पहले वह एक जानी-मानी बंगाली अभिनेत्री और गायिका थीं। कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने फिल्मों और टीवी में अपनी पहचान बनाई। लेकिन साल 2021 में जब उन्होंने तृणमूल कांग्रेस जॉइन की, तो उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। शुरुआत में विवादों और विरोध का सामना भी करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक मजबूत राजनीतिक आवाज के रूप में स्थापित कर लिया।

उनकी राजनीति का सबसे बड़ा मोड़ 2024 में आया, जब उन्होंने जादवपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में एंट्री की। यह वही सीट है जहां से कभी ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर को नई ऊंचाई दी थी। संसद में भी सायोनी घोष के भाषणों ने ध्यान खींचा। हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली—तीनों भाषाओं में उनकी पकड़ उन्हें अलग पहचान देती है। उनके बयान कई बार सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है।

सायोनी घोष का अंदाज सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं है। चुनावी मंचों पर वह कभी धार्मिक गीत गाती हैं, तो कभी शायरी सुनाती हैं। कई बार उन्हें हनुमान चालीसा और कलमा दोनों पढ़ते हुए भी देखा गया है, जिससे वह अलग-अलग समुदायों से जुड़ने की कोशिश करती नजर आती हैं। हालांकि इस वजह से उन्हें आलोचना और ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन इससे उनकी राजनीतिक सक्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस अब नई पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है, और सायोनी घोष उसी रणनीति का अहम हिस्सा हैं। ममता बनर्जी के बाद पार्टी को एक मजबूत, आक्रामक और जनता से जुड़ा चेहरा चाहिए, और सायोनी घोष उस भूमिका में फिट बैठती दिख रही हैं। उनकी छवि एक ऐसी नेता की बन रही है, जो आम लोगों की तरह दिखती है, लेकिन मंच पर पूरी ताकत के साथ अपनी बात रखती है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही अलग रही है, जहां महिला नेताओं की मजबूत मौजूदगी को स्वाभाविक माना जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सायोनी घोष अब एक नई पहचान गढ़ रही हैं। सवाल यही है कि क्या वह आने वाले समय में ममता बनर्जी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख नेता बनेंगी या यह चमक सिर्फ चुनावी माहौल तक सीमित रहेगी। फिलहाल इतना जरूर है कि बंगाल की सियासत में ‘नई दीदी’ की चर्चा तेज हो चुकी है।

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