हेल्थ | मोबनी मजुमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 28 अप्रैल 2026
भीषण गर्मी के इस दौर में एयर कंडीशनर लोगों की सबसे बड़ी राहत बन चुका है, लेकिन यही राहत कई बार शरीर के लिए परेशानी का कारण भी बन जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एसी की ठंडी हवा से निकलकर सीधे तेज धूप में जाना शरीर के लिए अचानक झटका जैसा होता है, जिसका असर दिल, दिमाग और रक्त वाहिकाओं पर एक साथ पड़ता है। जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. विनया वी भंडारी के मुताबिक, यह बदलाव शरीर के तापमान संतुलन तंत्र को अचानक सक्रिय कर देता है, जिससे कुछ समय के लिए असहजता महसूस हो सकती है।मानव शरीर सामान्य रूप से 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच अपना आंतरिक तापमान बनाए रखता है, जिसे दिमाग का एक अहम हिस्सा—हाइपोथैलेमस—नियंत्रित करता है। जब कोई व्यक्ति ठंडे कमरे से निकलकर गर्म वातावरण में जाता है, तो शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं, पसीना निकलना शुरू होता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है, ताकि शरीर खुद को ठंडा रख सके। लेकिन यह पूरी प्रक्रिया तुरंत नहीं होती, और इसी दौरान शरीर को ‘हीट शॉक’ जैसा एहसास होता है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह ‘शॉक’ वास्तव में नर्वस सिस्टम की प्रतिक्रिया है, जो तापमान में अचानक बदलाव के कारण होती है। त्वचा में मौजूद तापमान सेंसर एकदम से सक्रिय हो जाते हैं और दिमाग को तेज संकेत भेजते हैं। इस कारण कुछ लोगों को चक्कर आना, सिर भारी लगना या कुछ क्षणों के लिए भ्रम जैसी स्थिति का अनुभव हो सकता है। खासकर वे लोग जो पहले से डिहाइड्रेशन या लो ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हों, उनमें यह असर ज्यादा तेज हो सकता है।
गर्मी में एक और बड़ी समस्या शरीर में पानी की कमी है। एसी वाले माहौल में नमी कम होती है, जिससे बिना पसीना आए भी शरीर धीरे-धीरे डिहाइड्रेट होता रहता है। ऐसे में जब कोई व्यक्ति बाहर निकलता है, तो तेज पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी और बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि अचानक थकान, सिरदर्द और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और Centers for Disease Control and Prevention जैसी संस्थाएं भी गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीने पर जोर देती हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं, तापमान में इस तरह के अचानक बदलाव से माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या भी बढ़ सकती है। शोध बताते हैं कि वातावरण में अचानक बदलाव दिमाग के ‘पेन पाथवे’ को सक्रिय कर देता है, जिससे दर्द शुरू हो जाता है। माइग्रेन के मरीजों में यह समस्या और अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि उनका दिमाग ऐसे बदलावों के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है।
दिलचस्प बात यह है कि केवल ठंड से गर्म में जाना ही नहीं, बल्कि धूप से सीधे एसी में जाना भी शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, पसीना कम हो जाता है और शरीर का तापमान तेजी से गिरता है। कई लोगों को इससे ठंड के कारण सिरदर्द, मांसपेशियों में अकड़न या साइनस जैसी दिक्कतें भी महसूस होती हैं। हालांकि, यह प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और शरीर कुछ समय में खुद को संतुलित कर लेता है।
डॉक्टर यह भी साफ करते हैं कि तापमान में बदलाव से सीधे कोई संक्रमण नहीं होता, क्योंकि बीमारियों का कारण वायरस और बैक्टीरिया होते हैं। लेकिन बार-बार ठंडे और गर्म माहौल में जाने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव जरूर पड़ता है, जिससे थकान और असहजता बढ़ सकती है। लंबे समय तक लगातार एसी में रहने से शरीर की प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता भी कमजोर पड़ सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि एसी से बाहर निकलते समय कुछ मिनट छाया में रुकें, पर्याप्त पानी पीते रहें और एसी का तापमान बहुत कम न रखें। अगर चक्कर या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत आराम करें और शरीर को वातावरण के अनुसार ढलने का समय दें। क्योंकि गर्मी और ठंड के बीच यह संतुलन ही तय करता है कि आपका शरीर स्वस्थ रहेगा या परेशानी में पड़ जाएगा।




