बिजनेस / नेपाल | समी अहमद | ABC NATIONAL NEWS | सीमावर्ती क्षेत्र | 28 अप्रैल 2026
भारत और नेपाल के बीच दशकों से चले आ रहे खुले सीमा संबंधों ने दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में एक अनोखी आर्थिक व्यवस्था खड़ी की थी, जहां रोजमर्रा के सामान से लेकर कीमती धातुओं तक का लेन-देन सहज रूप से होता रहा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड से लगे सीमाई बाजारों में नेपाली नागरिक बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए आते थे, क्योंकि भारतीय बाजारों में सोना-चांदी समेत कई सामान अपेक्षाकृत सस्ते मिलते थे। लेकिन अब नेपाल सरकार द्वारा लगाए गए ‘भंसार टैक्स’ यानी सीमा शुल्क ने इस पूरी व्यवस्था को झटका दे दिया है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों और व्यापार पर दिखाई देने लगा है।
दरअसल, नेपाल में नई सरकार बनने के बाद सीमा पार से आने वाले सामानों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। अब छोटे से छोटे सामान पर भी टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे पहले जो व्यापार बिना ज्यादा रुकावट के चलता था, वह धीमा पड़ गया है। सोना और चांदी जैसे कीमती धातु, जो पहले कीमत के अंतर के कारण सीमा पार ले जाए जाते थे, अब महंगे पड़ने लगे हैं। व्यापारियों के मुताबिक, इस टैक्स के बाद नेपाल में सोने की कीमत भारतीय बाजारों की तुलना में ज्यादा हो गई है, जिससे तस्करी की संभावनाएं भी कम हुई हैं, लेकिन वैध व्यापार पर असर साफ दिख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भारतीय रुपये की मजबूती और टैक्स में ढील के कारण नेपाल में कई वस्तुएं सस्ती पड़ती थीं, लेकिन अब नई कर व्यवस्था ने समीकरण बदल दिया है। नेपाल में आयातित सोने पर बढ़े शुल्क और निगरानी के चलते कीमतों में अंतर बढ़ गया है। वहीं भारत में सोने की कीमतें वैश्विक बाजार के अनुसार उतार-चढ़ाव के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में खरीदारों का रुझान फिर भारतीय बाजारों की ओर लौटने लगा है।
सीमा से जुड़े 30 से अधिक छोटे-बड़े बाजारों पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां नेपाल से आने वाले ग्राहकों की भीड़ रहती थी, वहां अब कारोबारियों को ग्राहकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई व्यापारियों का कहना है कि बिक्री में गिरावट आई है, क्योंकि टैक्स के कारण नेपाल से आने-जाने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। वहीं नेपाल के अंदर भी स्थानीय बाजारों में सोने-चांदी की खरीदारी पर असर पड़ा है, क्योंकि बढ़ी कीमतों ने आम ग्राहकों की पहुंच को सीमित कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत-नेपाल के पारंपरिक व्यापार मॉडल को नए सिरे से संतुलित करने की जरूरत है। दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी गहरे जुड़े हुए हैं। ऐसे में टैक्स और नियमों में बदलाव का असर सिर्फ बाजार तक नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि ‘भंसार टैक्स’ के बाद सोना भारत में अपेक्षाकृत सस्ता और नेपाल में महंगा हो गया है। हालांकि अंतिम कीमतें वैश्विक बाजार, आयात शुल्क और स्थानीय टैक्स पर निर्भर करती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में सीमावर्ती इलाकों में सोने-चांदी का पूरा गणित बदल चुका है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल सरकार अपनी नीति में बदलाव करती है या यह नया आर्थिक संतुलन लंबे समय तक कायम रहता है।




