अंतरराष्ट्रीय/ नेपाल | एजेंसी / ABC NATIONAL NEWS | काठमांडू | 28 अप्रैल 2026
नेपाल की हालिया जनगणना के आंकड़े देश की सामाजिक संरचना की एक अहम तस्वीर पेश करते हैं। 2021 की जनगणना के अनुसार, नेपाल में मुस्लिम आबादी लगभग 14.83 लाख से 15 लाख के बीच है, जो कुल जनसंख्या का करीब 5.09 प्रतिशत हिस्सा है। इस आंकड़े के साथ मुस्लिम समुदाय नेपाल का तीसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह बन गया है। बीते दशक में इस आबादी में हल्की लेकिन लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की जनसंख्या प्रवृत्तियों को समझने में महत्वपूर्ण संकेत देती है।
अगर पिछले आंकड़ों से तुलना करें तो 2011 की जनगणना में मुस्लिम आबादी लगभग 4.4 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 5 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वृद्धि प्राकृतिक जनसंख्या वृद्धि और सीमावर्ती इलाकों में सामाजिक-आर्थिक बदलावों का परिणाम है। हालांकि यह बढ़ोतरी बहुत तेज नहीं है, लेकिन स्थिर और निरंतर है, जो नेपाल के जनसंख्या संतुलन में धीरे-धीरे बदलाव का संकेत देती है।
नेपाल में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा तराई क्षेत्र में केंद्रित है। अनुमान के मुताबिक, करीब 80 से 90 प्रतिशत मुसलमान तराई के जिलों में रहते हैं। खास तौर पर बांके, कपिलवस्तु, परसा, रौतहट और सुनसरी जैसे जिलों में इनकी संख्या अधिक है। ये इलाके भारत-नेपाल सीमा के करीब स्थित हैं, जहां सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी काफी गहरे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने के कारण यहां के मुस्लिम समुदाय का जीवन-व्यवहार और व्यापारिक गतिविधियां भी भारत से जुड़ी रहती हैं।
नेपाल में मुस्लिम समुदाय का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस्लाम का आगमन नेपाल में लगभग 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ, जब कश्मीर, तिब्बत और उत्तर भारत से व्यापारी और कारीगर यहां आए। धीरे-धीरे ये लोग काठमांडू घाटी और तराई क्षेत्रों में बस गए। मध्यकाल में मल्ला राजाओं के शासन के दौरान भी मुस्लिम कारीगरों और व्यापारियों को संरक्षण मिला, जिससे उनकी संख्या और भूमिका दोनों बढ़ी।
इसके बाद राणा शासन (1846-1951) के दौरान भी मुस्लिम आबादी में वृद्धि देखी गई, जब भारत से आए लोगों को नेपाल में बसने की अनुमति दी गई। खासकर 1857 के विद्रोह के बाद कई मुस्लिम परिवार नेपाल आकर बस गए। इन लोगों ने कृषि, व्यापार और हस्तशिल्प के क्षेत्र में योगदान दिया और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
आज के समय में नेपाल का मुस्लिम समुदाय मुख्य रूप से सुन्नी परंपरा का पालन करता है, जबकि अहमदिया समुदाय की उपस्थिति बहुत कम है। देश के विभिन्न हिस्सों में मस्जिदें, मदरसे और पुराने मुस्लिम मोहल्ले इस समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं। काठमांडू, नेपालगंज और तराई के कई जिलों में मुस्लिम आबादी का सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव साफ देखा जा सकता है।
नेपाल में मुस्लिम आबादी भले ही कुल जनसंख्या का छोटा हिस्सा हो, लेकिन ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से यह समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। आने वाले समय में भी जनसंख्या के इन रुझानों पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह देश की सामाजिक संरचना और नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकता है।




