Home » National » “कठमुल्ला संस्कृति” का ज़हर उगलते योगी आदित्यनाथ! कान में तेल डाल के सो रहा चुनाव आयोग…

“कठमुल्ला संस्कृति” का ज़हर उगलते योगी आदित्यनाथ! कान में तेल डाल के सो रहा चुनाव आयोग…

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | कोलकाता/ नई दिल्ली /लखनऊ | 13 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपने आक्रामक और विभाजनकारी अंदाज में बयान देकर पूरे देश को चौंका दिया है। रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में योगी ने साफ-साफ कहा कि बंगाल में बंगाली ही बोली जाएगी, ये कठमुल्लापन की संस्कृति यहां नहीं चलने दी जाएगी…। एक सिटिंग चीफ मिनिस्टर के मुंह से “कठमुल्ला” जैसे घृणित और अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल न सिर्फ मुस्लिम समुदाय की भावनाओं पर सीधा हमला है, बल्कि पूरे संवैधानिक मूल्यों को ठुकराने वाला है। दरअसल, “कठमुल्लापन” नहीं, असल समस्या “विभाजनकारी मानसिकता” है — जो योगी जैसे नेताओं के बयानों में साफ दिख रही है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी चरम पर है। योगी आदित्यनाथ, जो खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बताते हैं, लगातार मुस्लिम संस्कृति, उर्दू भाषा और मध्यकालीन भारतीय सभ्यता को निशाना बना रहे हैं। “कठमुल्लापन” शब्द का इस्तेमाल करके उन्होंने न सिर्फ उर्दू भाषा को, बल्कि मुस्लिम परंपरा, उनके रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को “अपराध” करार दे दिया है। क्या यह भाषा किसी लोकतांत्रिक देश के मुख्यमंत्री को शोभा देती है? क्या यह भाषा संविधान की भावना के अनुरूप है? सवाल ये है कि क्या एक मुख्यमंत्री को दूसरे राज्य की संस्कृति और भाषा पर इस तरह थोपने का अधिकार है?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि चुनाव आयोग (EC) इस पूरे मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। आयोग के अधिकारी जहां विपक्ष की छोटी – छोटी बातों पर एक्शन लेने में तेज होते हैं, वहीं बीजेपी के किसी भी नेता पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। यहां एक सिटिंग CM द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को “कठमुल्ला” कहकर अपमानित करने पर आयोग की आंखें बंद हैं। क्या चुनाव आयोग पिछले 12 साल से सिर्फ दिखावे का संस्थान बनकर रह गया है? क्या मुस्लिम विरोधी बयानों पर कार्रवाई करने का साहस इनमें बिल्कुल खत्म हो गया है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो हर मौके पर “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का नारा देते नहीं थकते, इस बार भी चुप्पी साधे बैठे हैं। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर वे झुकेंगे, माल्यार्पण करेंगे, लंबे-लंबे भाषण देंगे, लेकिन अपने कैबिनेट सहयोगी और सबसे आक्रामक चेहरे योगी के इस घृणा भरे बयान पर एक शब्द भी नहीं बोलेंगे। यह दोहरा चरित्र स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भाजपा के लिए वोट बैंक की राजनीति संवैधानिक मूल्यों से ऊपर है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) की भूमिका भी संदिग्ध है। जब देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा भाषण लगातार बढ़ रहे हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का मौन क्यों? क्या “कठमुल्ला संस्कृति” जैसे शब्दों को “स्वतंत्र अभिव्यक्ति” का हिस्सा माना जाएगा? क्या मुस्लिम नागरिकों की गरिमा और भावनाओं की रक्षा करना न्यायपालिका का दायित्व नहीं है?

यह बयान सिर्फ एक भाषण नहीं है। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा लगातार मुस्लिम समुदाय को “घुसपैठिया”, “परजीवी” और अब “कठमुल्ला” जैसे शब्दों से जोड़कर हिंदू वोटों को ध्रुवीकृत करने की कोशिश कर रही है। योगी आदित्यनाथ का यह बयान पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार को निशाना बनाने के साथ-साथ देशव्यापी मुस्लिम विरोधी माहौल बनाने की साजिश भी है।

देश के संवैधानिक संस्थानों से सवाल पूछा जाना चाहिए — क्या आप अल्पसंख्यकों को इस देश में दूसरे दर्जे का नागरिक समझते हैं? क्या उर्दू भाषा, जिसने हिंदुस्तानी तहजीब को समृद्ध किया, अब अपराध है? क्या मुस्लिम संस्कृति को “कठमुल्लापन” कहकर अपमानित करना अब नया सामान्य बन गया है?

योगी आदित्यनाथ का यह बयान न सिर्फ अत्यंत निंदनीय है, बल्कि देश की सांप्रदायिक सद्भावना के लिए खतरनाक है। अगर सत्ताधारी दल और उसके मुख्यमंत्री इस स्तर का घृणा भाषण देते रहेंगे तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी। समय आ गया है कि देश जागे, संस्थान जागें और ऐसे विभाजनकारी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments