राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 अप्रैल 2026
दिल्ली के रामलीला मैदान में कल दोपहर जब कन्हैया कुमार मंच पर चढ़े तो हवा में पहले से ही तनाव था। चारों तरफ बीजेपी के कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे, लेकिन जैसे ही पूर्व जेएनयू छात्र नेता ने माइक संभाला और वो एक लाइन बोले, पूरा मैदान सन्नाटे में डूब गया। “कांग्रेस से देशभक्ति का प्रमाण मांगना ऐसा ही है, जैसे अपने ही पिता से यह साबित करने को कहना कि वे आपके पिता हैं,” उन्होंने कहा। बस, एक पल में सारा माहौल बदल गया। लोग तालियां बजाने लगे, कुछ तो आंखें नम कर बैठ गए। ये कोई सामान्य बयान नहीं था, ये वो तीर था जो बीजेपी की पूरी ‘देशभक्ति की दुकान’ पर सीधा लग गया। कन्हैया ने सिर्फ़ एक वाक्य में वो बात कह दी जो लाखों कांग्रेसियों के मन में सालों से घुमड़ रही थी।
बात शुरू हुई थी हाल ही में चले उस विवाद से जब कुछ बीजेपी नेता और उनके समर्थक लगातार कांग्रेस पार्टी पर ‘देशभक्ति साबित करो’ का ठप्पा लगाने लगे थे। राहुल गांधी की विदेश यात्रा हो, या फिर पुरानी आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल, हर जगह से वही पुराना राग अलापा जा रहा था। कन्हैया कुमार ने उस मंच से खुलकर कहा कि ये सिलसिला नया नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब भी कांग्रेस ने सत्ता में आने का सपना देखा, तुरंत ‘देशद्रोही’ का टैग लगा दिया जाता है। “भाई, ये देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी थी, गांधी-नेहरू ने लड़ी थी, लेकिन आज उसी कांग्रेस से पूछा जा रहा है कि तुम देशभक्त हो या नहीं? ये मजाक नहीं, ये शर्मिंदगी है,” कन्हैया ने गरजते हुए कहा। उनका स्वर इतना तेज़ था कि आस-पास बैठे बुजुर्ग नेता भी मुस्कुराने लगे।
मंच पर खड़े होकर कन्हैया ने आगे बताया कि ये सवाल सिर्फ़ कांग्रेस पर नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति या पार्टी पर उठाया जाता है जो बीजेपी की विचारधारा से थोड़ा भी अलग हो। उन्होंने उदाहरण दिया – “जब मैं जेएनयू में था तो भी यही कहा गया कि हम देश के टुकड़े-टुकड़े कर रहे हैं। आज कांग्रेस में हूं तो वही पुराना गाना। लेकिन सच्चाई ये है कि देशभक्ति किसी की जेब में बंद नहीं है। ये दिल में होती है।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर आग लग गई। #KanhaiyaFatherQuote ट्रेंड करने लगा। एक तरफ कांग्रेस कार्यकर्ता इसे अपना नया हथियार बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी के आईटी सेल वाले इसे ‘डायवर्सन’ बता रहे हैं। लेकिन सच ये है कि कन्हैया ने जो कहा, वो आम आदमी के दिल की बात थी।
कई पुराने कांग्रेस नेता, जो अब साइडलाइन पर हैं, भी इस बयान से खुश नजर आए। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कन्हैया ने वो कहा जो हम सालों से सोचते थे लेकिन बोल नहीं पाते थे। पिता को साबित करने वाला उदाहरण इतना सटीक था कि विरोधी भी कुछ बोल नहीं पा रहे।” दरअसल, कन्हैया कुमार का ये बयान सिर्फ़ एक राजनीतिक हमला नहीं था, बल्कि एक पीढ़ी की पीड़ा का बयान था। वो पीड़ा जो 2014 के बाद से हर उस नेता को महसूस हो रही है जो मोदी-शाह की राजनीति की आंधी में फंस गया है। उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति का प्रमाण मांगने वाले खुद कभी आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं थे, बल्कि वो उसी परिवार से हैं जिन्होंने ब्रिटिश राज में चुपचाप बैठकर फायदे उठाए।
रामलीला मैदान से निकलते वक्त जब कन्हैया से पत्रकारों ने पूछा कि क्या ये बयान राहुल गांधी को भी पसंद आएगा, तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया, “राहुल जी तो खुद कह चुके हैं कि हमारा परिवार देश के लिए बलिदान देता रहा है। अब प्रमाण किस बात का?” पूरा बयान सुनकर वहां मौजूद युवा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर गई। कई लड़कियां-लड़के कन्हैया के आस-पास घेरा बनाकर सेल्फी ले रहे थे। एक युवा कार्यकर्ता ने कहा, “सर, आपने आज जो बोला, वो स्क्रीन पर वायरल हो जाएगा। लोग अब पिता वाला उदाहरण हर बहस में इस्तेमाल करेंगे।”
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या कन्हैया कुमार अब कांग्रेस की नई चेहरा बन रहे हैं? या फिर ये सिर्फ़ एक और आक्रोश भरा भाषण था जो कल तक भूल भी जाएगा? लेकिन एक बात तय है – कन्हैया ने जो कहा, वो आसानी से भुलाया नहीं जा सकता। क्योंकि जब कोई अपने पिता की इज्जत पर सवाल उठाने वाले को आईना दिखा दे, तो वो आईना पूरे राजनीतिक परिदृश्य को हिला देता है। अब देखना ये है कि बीजेपी इस तीर का क्या जवाब देती है। क्योंकि पिता का प्रमाण मांगने वाला सवाल अब कांग्रेस की तरफ से बीजेपी की तरफ लौट चुका है।



