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शी-किम मुलाकात पर दुनिया की नजर, उत्तर कोरिया पहुंचेंगे चीन के राष्ट्रपति

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग/प्योंगयांग | 6 जून 2026

एशिया की राजनीति में अगले सप्ताह एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम होने जा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया की यात्रा करेंगे, जहां उनकी मुलाकात उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से होगी। करीब सात वर्षों बाद हो रही यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव, उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम, अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा और रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

चीन और उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया है कि शी जिनपिंग किम जोंग उन के निमंत्रण पर प्योंगयांग पहुंचेंगे। दोनों देशों के बीच लंबे समय से करीबी रणनीतिक संबंध रहे हैं। चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी माना जाता है और दोनों देश रक्षा सहयोग समझौते से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग उन इस यात्रा का उपयोग दुनिया को यह संदेश देने के लिए करेंगे कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी दबाव के बावजूद उनका देश अलग-थलग नहीं पड़ा है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु कार्यक्रम को और मजबूत करने का दावा किया था। किम ने कहा था कि उनके देश की परमाणु सामग्री उत्पादन क्षमता पिछले पांच वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़ी है। ऐसे में शी जिनपिंग की यात्रा उत्तर कोरिया के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखी जा रही है।

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दूसरी ओर चीन भी उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकियों ने बीजिंग की चिंता बढ़ाई है। माना जा रहा है कि शी जिनपिंग की यह यात्रा प्योंगयांग को चीन के रणनीतिक दायरे में बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा भी है। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, पर्यटन और सीमा पार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका भी इस मुलाकात पर नजर बनाए हुए हैं। सियोल को उम्मीद है कि चीन उत्तर कोरिया को वार्ता की मेज पर लौटने के लिए प्रेरित कर सकता है। हालांकि उत्तर कोरिया पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे हटने वाला नहीं है और दक्षिण कोरिया के साथ पुनर्एकीकरण की पुरानी नीति भी समाप्त कर चुका है।

कुल मिलाकर शी जिनपिंग और किम जोंग उन की यह मुलाकात केवल दो नेताओं की बैठक नहीं बल्कि एशिया की बदलती भू-राजनीति का बड़ा संकेत मानी जा रही है। इस यात्रा के नतीजे आने वाले समय में चीन, उत्तर कोरिया, रूस, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। दुनिया की निगाहें अब इस हाई-प्रोफाइल बैठक पर टिकी हुई हैं।

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