स्वास्थ्य | संजीव कुमार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 6 जून 2026
दिल की बीमारियों और अचानक आने वाले हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि क्या सामान्य ECG रिपोर्ट आने का मतलब यह है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक नहीं हो सकता। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि केवल ECG के आधार पर हार्ट अटैक की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। कई मामलों में शुरुआती चरण में ECG सामान्य दिखाई दे सकता है, जबकि मरीज के शरीर में हार्ट अटैक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सीने में दबाव, दर्द, घबराहट, अत्यधिक पसीना आना, सांस फूलना, कंधे, गर्दन, जबड़े या हाथ में दर्द जैसे लक्षण महसूस हो रहे हों, तो केवल एक सामान्य ECG देखकर निश्चिंत नहीं होना चाहिए। डॉक्टर बताते हैं कि हार्ट अटैक की पुष्टि के लिए कई बार लगातार ECG, ट्रोपोनिन जैसे रक्त परीक्षण, इकोकार्डियोग्राफी और अन्य जांचों की आवश्यकता पड़ सकती है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मरीजों, विशेषकर मधुमेह से पीड़ित लोगों, महिलाओं और बुजुर्गों में हार्ट अटैक के लक्षण सामान्य नहीं होते। ऐसे मरीजों में केवल कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, मतली या असामान्य थकान जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए जोखिम वाले लोगों को किसी भी संदिग्ध लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर जांच और उपचार हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को काफी हद तक कम कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाना चाहिए। स्वयं दवा लेने या घर पर इंतजार करने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, तनाव और पारिवारिक इतिहास जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली दिल को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि सामान्य ECG एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन यदि लक्षण मौजूद हैं तो केवल इसी आधार पर हार्ट अटैक की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। किसी भी संदेह की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह लेना और आवश्यक जांच कराना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।




