व्यापार/अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | शंघाई | 6 जून 2026
दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादक देश चीन में ऊर्जा क्षेत्र का नया रुझान तेजी से उभर रहा है। सोलर पैनलों की बिक्री में सुस्ती, लगातार गिरती कीमतों और घटते मुनाफे के बीच चीन की दिग्गज सौर ऊर्जा कंपनियां अब बैटरी स्टोरेज कारोबार पर बड़ा दांव लगा रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा भंडारण तकनीक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत और सबसे बड़ा बाजार बनने जा रही है। यही वजह है कि अब चीन की प्रमुख सौर कंपनियां अपनी रणनीति बदलकर बैटरी निर्माण और ऊर्जा भंडारण समाधान पर भारी निवेश कर रही हैं।
जिंकोसोलर, जेए सोलर, लॉन्गी ग्रीन एनर्जी और ट्रिना सोलर जैसी बड़ी कंपनियां अब केवल सोलर पैनल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। इन कंपनियों का मानना है कि भविष्य में केवल बिजली पैदा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उस बिजली को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। इसी सोच के तहत चीन की सौर कंपनियां अब सोलर और बैटरी स्टोरेज को एकीकृत समाधान के रूप में वैश्विक बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। शंघाई में आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा प्रदर्शनी में भी इस बदलाव की स्पष्ट झलक देखने को मिली, जहां कई कंपनियों के स्टॉल पर सोलर पैनलों की तुलना में ऊर्जा भंडारण उत्पादों को अधिक प्रमुखता दी गई।
उद्योग सूत्रों के अनुसार जिंकोसोलर इस वर्ष के अंत तक अपनी बैटरी निर्माण क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी की मौजूदा क्षमता 5 गीगावाट-घंटे है, जिसे बढ़ाकर 13 से 14 गीगावाट-घंटे तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि दुनिया भर में सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग में तेजी से वृद्धि हो रही है, लेकिन इन स्रोतों की सबसे बड़ी चुनौती उनकी अनियमित उपलब्धता है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा का वास्तविक विस्तार तभी संभव है जब अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जा सके। दिन में उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा को बैटरियों में संग्रहित कर रात के समय या आवश्यकता पड़ने पर उपयोग किया जा सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा भंडारण को अब सौर ऊर्जा उद्योग की “दूसरी विकास यात्रा” माना जा रहा है। चीन की कंपनियां इस अवसर को भुनाने के लिए तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
भारत, जापान, वियतनाम, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और नीदरलैंड जैसे देशों में भी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऊर्जा विश्लेषकों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में चीन से ऊर्जा भंडारण बैटरियों का निर्यात लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 150 गीगावाट-घंटे तक पहुंच सकता है। इसके विपरीत सोलर पैनलों के निर्यात में वृद्धि की गति पिछले कई वर्षों के मुकाबले सबसे धीमी रहने की संभावना है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार का केंद्र धीरे-धीरे केवल उत्पादन से हटकर भंडारण की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि इस क्षेत्र में चीन की सौर कंपनियों को पहले से स्थापित बैटरी दिग्गज कंपनियों जैसे CATL और BYD से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। फिर भी सौर कंपनियों का विश्वास है कि उनके पास वैश्विक सप्लाई चेन नेटवर्क, परियोजना प्रबंधन अनुभव और एकीकृत ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता है, जो उन्हें इस नए बाजार में मजबूत स्थिति दिला सकती है। कंपनियों का मानना है कि भविष्य में ग्राहक अलग-अलग कंपनियों से सोलर और बैटरी खरीदने के बजाय एक ही प्लेटफॉर्म से संपूर्ण ऊर्जा समाधान लेना पसंद करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज को अलग-अलग उद्योगों के रूप में नहीं देखा जाएगा। जिस तरह आज हर बड़ी ऊर्जा परियोजना में सोलर पैनल जरूरी हैं, उसी तरह भविष्य में बैटरी स्टोरेज भी उसका अनिवार्य हिस्सा बन जाएगा। चीन की कंपनियां इसी बदलाव को भांपते हुए अभी से अपने निवेश और उत्पादन रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रही हैं।
कुल मिलाकर, सोलर पैनल बाजार में मुनाफे पर बढ़ते दबाव के बीच चीन की कंपनियों ने बैटरी स्टोरेज को भविष्य का सबसे बड़ा अवसर मान लिया है। यदि वैश्विक स्तर पर हरित ऊर्जा की ओर बदलाव इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में बैटरी स्टोरेज उद्योग सौर ऊर्जा कारोबार से भी अधिक महत्वपूर्ण और लाभदायक क्षेत्र बन सकता है।




