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अमेरिका में चीनी ड्रिंक ब्रांड्स का बढ़ता दबदबा, ‘सॉफ्ट पावर’ का नया हथियार बनी बबल टी और कॉफी

अंतरराष्ट्रीय/ व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | न्यूयॉर्क | 6 जून 2026

अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और सामरिक प्रतिस्पर्धा भले ही लगातार बढ़ रही हो, लेकिन इसी बीच चीन एक नए मोर्चे पर अपनी मौजूदगी मजबूत करता दिखाई दे रहा है। यह मोर्चा है आम अमेरिकी उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी। न्यूयॉर्क से लेकर लॉस एंजिलिस, शिकागो और वॉशिंगटन तक चीनी मूल की चाय और कॉफी चेन तेजी से फैल रही हैं। मिक्स्यू (Mixue), हेटी (HeyTea), लकिन कॉफी (Luckin Coffee) और कॉटी कॉफी (Cotti Coffee) जैसे ब्रांड अमेरिकी बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि चीन की बढ़ती “सॉफ्ट पावर” का भी संकेत हो सकता है।

न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन इलाके में रहने वाली मकैडा जॉर्ज जैसे हजारों अमेरिकी ग्राहक अब इन नए ब्रांड्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई उपभोक्ताओं को यह भी नहीं पता कि जिन पेय पदार्थों का वे आनंद ले रहे हैं, वे चीन से जुड़े ब्रांड हैं। सस्ती कीमतें, नए स्वाद, आधुनिक डिज़ाइन और डिजिटल ऑर्डरिंग सिस्टम इन ब्रांड्स को अमेरिकी युवाओं के बीच लोकप्रिय बना रहे हैं। खासकर बबल टी, जैस्मिन टी और चीनी शैली के दूध वाली चाय के पेय पदार्थ तेजी से ट्रेंड में आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी देश की सॉफ्ट पावर केवल फिल्मों, संगीत या राजनीतिक संदेशों से नहीं बढ़ती, बल्कि रोजमर्रा की उपभोक्ता आदतों के माध्यम से भी विकसित होती है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि जब कोई व्यक्ति रोज एक चीनी ब्रांड की चाय या कॉफी खरीदता है, तो वह अनजाने में चीनी संस्कृति, स्वाद और जीवनशैली के संपर्क में आता है। धीरे-धीरे चीन उसके लिए केवल एक भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। यही सॉफ्ट पावर की असली ताकत है।

हालांकि सभी विशेषज्ञ इस धारणा से सहमत नहीं हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि किसी उत्पाद की लोकप्रियता को सीधे राजनीतिक प्रभाव से जोड़ना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि अमेरिकी उपभोक्ता कम कीमत और बेहतर गुणवत्ता के कारण इन ब्रांड्स को पसंद कर रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं कि वे चीन की नीतियों, व्यापारिक रणनीतियों या राजनीतिक दृष्टिकोण के प्रति अधिक सकारात्मक हो रहे हैं। कई लोग चीन के उत्पादों का उपयोग करते हुए भी उसके प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण रख सकते हैं।

इसके बावजूद चीन की सांस्कृतिक उपस्थिति में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। टिकटॉक, हुआवेई, इलेक्ट्रिक वाहन, लैबुबू जैसे लोकप्रिय उत्पादों और अब चाय-कॉफी ब्रांड्स के जरिए चीन वैश्विक उपभोक्ता संस्कृति में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। खासकर जेनरेशन-ज़ेड यानी युवा वर्ग इन ब्रांड्स को तेजी से अपना रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार युवा पीढ़ी पारंपरिक अमेरिकी उपभोक्ता संस्कृति से अलग नए अनुभव तलाश रही है और चीनी ब्रांड उन्हें वही विकल्प प्रदान कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में कभी स्टारबक्स, मैकडॉनल्ड्स और लेवीज़ ने अमेरिकी जीवनशैली को दुनिया भर में पहुंचाने का काम किया था। आज चीन भी अपने उपभोक्ता ब्रांड्स के जरिए वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, मानवाधिकार मुद्दों और व्यापारिक विवादों के कारण इस प्रक्रिया को आसान नहीं माना जा सकता।

हालिया सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी जनता के बीच चीन को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण में कुछ सुधार हुआ है। इसके पीछे व्यापार, तकनीक और उपभोक्ता संस्कृति की बढ़ती पहुंच को भी एक कारण माना जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि चाय और कॉफी की दुकानों की बढ़ती संख्या अमेरिका में चीन के प्रति राजनीतिक या रणनीतिक सोच को बदल देगी।

फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका की सड़कों पर तेजी से फैलते चीनी पेय ब्रांड केवल कारोबार नहीं कर रहे, बल्कि वे चीन की सांस्कृतिक पहचान को भी नए तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बबल टी और कॉफी के जरिए चीन वास्तव में अपनी सॉफ्ट पावर को मजबूत कर पाता है या यह केवल एक सफल व्यावसायिक विस्तार बनकर रह जाता है।

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