राष्ट्रीय / कॉरपोरेट / व्यापार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 2 जून 2026
वेदांता समूह पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि देश में जांच एजेंसियों का इस्तेमाल चुनिंदा कॉरपोरेट और राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल ही में JP Associates के अधिग्रहण मामले में अडानी समूह को कानूनी चुनौती दी थी। पार्टी का कहना है कि इसके कुछ समय बाद ही वेदांता समूह पर ED की कार्रवाई शुरू हो गई, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
JP Associates की करीब 4 अरब डॉलर मूल्य की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए वेदांता ने ₹16,726 करोड़ की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। अनिल अग्रवाल का दावा है कि उन्हें लिखित रूप से सर्वोच्च बोलीदाता घोषित किया गया था, लेकिन बाद में फैसला बदल दिया गया। दूसरी ओर अडानी समूह की ₹14,535 करोड़ की बोली को समिति ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने बेहतर माना क्योंकि उसमें अग्रिम भुगतान अधिक था। बाद में NCLT ने भी अडानी समूह की योजना को मंजूरी दे दी।
वेदांता ने आरोप लगाया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और मूल्यांकन के मानदंड अडानी समूह के पक्ष में बनाए गए। कंपनी ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अडानी समूह की योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जबकि मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
कांग्रेस का आरोप है कि जिस कारोबारी समूह ने अडानी समूह के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया, उसी पर अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो रही है। पार्टी ने इसे “चिंताजनक संयोग” बताते हुए कहा कि इससे देश में निष्पक्ष कारोबारी माहौल और संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं।
हालांकि सरकार, ED और अडानी समूह की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है। ED का कहना है कि वेदांता समूह के खिलाफ जांच FEMA के कथित उल्लंघन से जुड़े मामलों में कानून के तहत की जा रही है।
फिलहाल वेदांता पर ED की कार्रवाई और JP Associates अधिग्रहण विवाद देश के सबसे चर्चित कॉरपोरेट और राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो चुके हैं, जबकि आरोपों और जवाबों के बीच सच्चाई का अंतिम फैसला न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं के बाद ही सामने आएगा।




