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ट्रंप का ईरान को खुला अल्टीमेटम: ‘कल मारा था, आज और जोरदार प्रहार करेंगे’

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/तेहरान | 11 जून 2026

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और अधिक सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका ने मंगलवार को ईरान को कड़ा जवाब दिया था और बुधवार को उससे भी अधिक शक्तिशाली हमला करेगा। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमने उन्हें कल बुरी तरह मारा था और आज फिर जोरदार हमला करेंगे।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने समझौते के लिए बहुत अधिक समय गंवा दिया है और अब उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इससे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव अब सीधे सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ रहा है।

ट्रंप की चेतावनी के कुछ ही समय बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या सैन्य आक्रामकता के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता और उसकी सेना अपनी संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उस पर हमला जारी रहता है तो जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

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अमेरिकी प्रशासन के अनुसार हालिया संकट की शुरुआत उस समय हुई जब होरमुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि हेलीकॉप्टर पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करने का फैसला लिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के रडार नेटवर्क, वायु रक्षा प्रणालियों और सैन्य नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाकर सटीक हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के अधिकार के तहत की गई है।

दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी हमलों के जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान का कहना है कि जॉर्डन और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया गया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया और किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

समुद्री मोर्चे पर भी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और चालक दल को निकालने के लिए बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाना पड़ा। भारतीय अधिकारियों के अनुसार जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविक अभी भी लापता हैं जबकि 21 अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस घटना ने वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

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होरमुज जलडमरूमध्य पहले से ही दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सैन्य टकराव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत समेत दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

कूटनीतिक मोर्चे पर भी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर शांति प्रयासों को विफल करने का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि अमेरिका लगातार विरोधाभासी संदेश दे रहा है और युद्धविराम की भावना को कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्थक बातचीत के लिए स्थिर वातावरण जरूरी है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था आईएईए (IAEA) ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए उसके यूरेनियम भंडार और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विस्तृत दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि ईरान लगातार इस आरोप को खारिज करते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताता रहा है।

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच दुनिया की निगाहें अब वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। ट्रंप की नई चेतावनी और ईरान की जवाबी चुनौती ने यह संकेत दे दिया है कि यदि जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है। फिलहाल वैश्विक समुदाय की सबसे बड़ी चिंता यही है कि यह टकराव कहीं नियंत्रण से बाहर न हो जाए।

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