अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन/नई दिल्ली | 12 जून 2026
पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे भारतीय जहाज़ों पर हुए ड्रोन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है और इसे उन्होंने “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया। साथ ही ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर “फर्जी दावे” कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि ट्रंप के इन आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि इसी सप्ताह भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले तीन व्यापारी जहाज़ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आए थे, जिनमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई। भारत ने इस घटना पर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध भी दर्ज कराया और साफ कहा कि ऐसे हमले बंद होने चाहिए।
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब वे एक ओर ईरान के खिलाफ “कड़ी कार्रवाई” की चेतावनी देते रहे हैं और दूसरी ओर दावा कर रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता लगभग तैयार है। लेकिन तेहरान ने कई बार संकेत दिया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है और ट्रंप के दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारतीय जहाज़ों और नाविकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। भारत में विपक्ष पहले ही अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत को लेकर केंद्र सरकार और अमेरिका दोनों से जवाब मांग रहा है।
उधर ट्रंप प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि ईरान ने होर्मुज़ क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाज़ों और समुद्री यातायात को निशाना बनाया है, जबकि ईरान अमेरिकी आरोपों को खारिज कर रहा है। दोनों देशों के परस्पर विरोधी दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भारतीय जहाज़ों पर हमलों और भारतीय नाविकों की मौत के बाद ट्रंप द्वारा ईरान पर सीधे आरोप लगाने से विवाद और गहरा सकता है। आलोचकों का तर्क है कि जब अमेरिकी कार्रवाई के कारण भारतीय नागरिकों की मौत पर सवाल उठ रहे हैं, तब पूरा ध्यान ईरान की ओर मोड़ने की कोशिश भी जांच के दायरे में आएगी। वहीं ट्रंप समर्थक इसे ईरान की आक्रामक गतिविधियों के खिलाफ अमेरिका की सख्त प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार है, शांति समझौते को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है और भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है। ऐसे में दुनिया की निगाहें वाशिंगटन, तेहरान और नई दिल्ली पर टिकी हुई हैं।




