अंतरराष्ट्रीय | एजेंसी/ ABC NATIONAL NEWS | वाशिंगटन | 11 मई 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह 13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। लगभग एक दशक बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा मानी जा रही है और इसे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बेहद अहम कूटनीतिक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव, टैरिफ युद्ध और ईरान संकट जैसे मुद्दे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। ट्रंप के साथ अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों — बोइंग, सिटीग्रुप और क्वालकॉम — के शीर्ष अधिकारी भी चीन जा सकते हैं, जहां व्यापारिक समझौतों पर बातचीत की संभावना जताई जा रही है।
कैसे शुरू हुआ अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर
डोनाल्ड ट्रंप ने 2016 के चुनाव अभियान में अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। इसके बाद 2018 में उन्होंने चीन से आने वाले लगभग 250 अरब डॉलर के सामान पर भारी टैरिफ लगा दिए। इसे अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर की शुरुआत माना गया।
इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिए। दोनों देशों के बीच यह आर्थिक टकराव लगातार बढ़ता गया। बाद में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी ट्रंप की कई नीतियां जारी रखीं और चीन की टेक कंपनियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और सेमीकंडक्टर सेक्टर पर सख्त प्रतिबंध लगाए।
ट्रंप की वापसी और नया टकराव
2025 में दोबारा सत्ता में आने के बाद ट्रंप ने चीन पर और सख्ती दिखाई। उन्होंने चीन पर 20% अतिरिक्त टैरिफ लगाया और “लिबरेशन डे” के तहत चीनी वस्तुओं पर 34% तक शुल्क बढ़ा दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच टैरिफ 100% से ऊपर पहुंच गया।
हालांकि अक्टूबर 2025 में दक्षिण कोरिया में हुई ट्रंप-शी बैठक के बाद कुछ टैरिफ रोक दिए गए और चीन ने रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात नियंत्रण में ढील दी। इसके बदले अमेरिका ने भी कुछ प्रतिबंधों में नरमी दिखाई।
इस बार एजेंडे में क्या-क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार बातचीत में मुख्य रूप से ये मुद्दे शामिल रह सकते हैं—
– व्यापारिक समझौते और टैरिफ में राहत
– अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद
– सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी निर्यात
– रेयर अर्थ मेटल्स की सप्लाई
– ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट
– वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार
ईरान युद्ध भी रहेगा बड़ा मुद्दा
ईरान और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। चीन, जो ईरान के तेल का बड़ा खरीदार है, इस संकट से पूरी तरह अछूता नहीं है। हालांकि रूस से तेल आपूर्ति और घरेलू उत्पादन के कारण चीन ने अब तक स्थिति को काफी हद तक संभाल रखा है।
अमेरिका भी ऊर्जा संकट और वैश्विक महंगाई के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच ईरान युद्ध को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
दुनिया की नजर इस मुलाकात पर
विश्लेषकों के मुताबिक यह यात्रा सिर्फ अमेरिका-चीन संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार, टेक्नोलॉजी सेक्टर और भू-राजनीति पर भी पड़ेगा।
ट्रंप के लिए यह दौरा घरेलू राजनीति और वैश्विक नेतृत्व दोनों स्तरों पर अहम माना जा रहा है, जबकि चीन इसे अमेरिका के साथ संबंधों में स्थिरता लाने और अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के अवसर के रूप में देख रहा है।




